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निदेशक के विचार
डॉ. प्रशांत क. ढ़ाकेफलकर
निदेशक
प्रिय मित्रों, सहयोगियों और शुभचिंतकों,
आघारकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पुणे की अद्भुत यात्रा पर विचार करते हुए मुझे अपार गर्व और गहरी जिम्मेदारी का अनुभव होता है। हमारी संस्था की स्थापना 1946 में दूरदर्शी वैज्ञानिक प्रो. एस. पी. आघारकर द्वारा महाराष्ट्र विज्ञान वर्धिनी के रूप में की गई थी। तब से लेकर आज तक लगभग आठ दशकों में एआरआई वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है। जीवविज्ञान और कृषि के बुनियादी शोध में हमारे प्रारंभिक योगदान से लेकर खाद्य सुरक्षा, जैवविविधता संरक्षण और जैव-संसाधनों के उपयोग जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के समाधान तक — एआरआई ने सदैव राष्ट्रसेवा को अपना ध्येय बनाए रखा है।
आज एआरआई अत्याधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी संस्था है। यह हमारे उत्साही और समर्पित वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं, छात्रों और कर्मचारियों की सक्रिय समुदाय-भावना से संचालित है, जो ज्ञान की सीमाओं को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। सतत कृषि, सूक्ष्मजीव विविधता, आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन या जलवायु-सहिष्णु जैव-अर्थव्यवस्था—हमारे हर योगदान में न केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता प्रतिबिंबित होती है, बल्कि समाज के कल्याण के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है। संस्थानों, उद्योगों और समुदायों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देकर हम अपने कार्य के प्रभाव को अधिकतम करने और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि विज्ञान समावेशी विकास का प्रमुख प्रेरक बना रहे।
भविष्य की ओर देखते हुए हमारी प्राथमिकताएँ स्पष्ट और प्रेरणादायक हैं—नवाचार को प्रोत्साहित करना, अंतःविषय समन्वय को सशक्त बनाना, और अनुसंधान को ठोस सामाजिक प्रभाव में बदलना। हम भारत तथा विश्व के अग्रणी संस्थानों के साथ सहयोग को सुदृढ़ कर रहे हैं ताकि सामूहिक ज्ञान और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। साथ ही, हम पारदर्शिता, सहयोगात्मक प्रशासन और वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा की संस्कृति को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे संस्था में विश्वास बढ़े और एआरआई परिवार का हर सदस्य सशक्त महसूस करे।
मेरा उद्देश्य है कि एआरआई को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में स्थापित करूँ—एक ऐसा संस्थान जो न केवल अग्रणी विज्ञान को आगे बढ़ाए, बल्कि भारत को ज्ञान-समृद्ध महाशक्ति के रूप में उभरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। मैं एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता हूँ जहाँ हमारा शोध नीति-निर्माण को दिशा दे, समुदायों को सशक्त बनाए और सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान करे। यह लक्ष्य हमारी पहुँच में है—और हम इसे मिलकर पूरा करेंगे।
यह दृष्टि पारदर्शिता, उत्कृष्ट शासन और वैश्विक प्रासंगिकता के स्तंभों पर आधारित है। हमारा प्रयास है कि एआरआई एक ऐसा केंद्र बने जहाँ सृजनात्मकता और दृढ़ता साथ-साथ आगे बढ़ें, जहाँ युवाओं को प्रेरणा मिले, और जहाँ सामूहिक प्रयास राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व के समाधान प्रस्तुत करें। इस दौरान, हम ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता पुनः दोहराते हैं।
सभी वैज्ञानिकों, विद्वानों, पूर्व छात्रों, सहयोगियों और समर्थकों के प्रति—जो इस असाधारण यात्रा का हिस्सा रहे हैं—मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। आपकी निष्ठा और समर्पण ही एआरआई की जीवनधारा है। आइए, हम सब मिलकर नई ऊर्जा और साझा उद्देश्य के साथ अपनी गौरवपूर्ण विरासत को आगे बढ़ाएँ और उत्कृष्टता के अगले अध्याय को साहस के साथ लिखें। एआरआई की यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक उद्देश्य-समर्पित समुदाय की है। आइए, हम मिलकर एआरआई की प्रतिष्ठित विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ और ऐसा भविष्य निर्मित करें जहाँ विज्ञान सतत प्रगति और सामाजिक कल्याण का मार्ग प्रकाशित करता रहे।











