नैनो जीव विज्ञान
नैनो जीव विज्ञान समूह की स्थापना सन् 2007 में सूक्ष्मजैविकी विज्ञान प्रभाग के तत्कालीन 'धातु-सूक्ष्मजीव पारस्परिक क्रिया' समूह के विस्तार (स्पिन-ऑफ़) के रूप में हुई थी।
"क्या धातुओं से पारस्परिक क्रिया करने वाले सूक्ष्मजीव नैनोकणों का संश्लेषण करते हैं?" — इस सरल, पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रश्न का समाधान करने के लिए, समूह ने 'सूक्ष्मजैविकी द्वारा पदार्थ विज्ञान एवं अभियान्त्रिकी' नामक एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाया। इस दृष्टिकोण के माध्यम से समूह ने धातु-आधारित नैनो पदार्थों के संश्लेषण की दिशा में अग्रणी कार्य किया।
कालांतर में, संस्थान में नैनो जीव विज्ञान विषय पर एक सुदृढ़ अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करने के लिए संगठित प्रयास किए गए, जो इस क्षेत्र की समग्र व्यापकता को समाहित करता है।
हमारे अनुसंधान की रुचियाँ नैनोपदार्थों का संश्लेषण एवं विश्लेषण, उत्पाद विकास, उपकरणों का सूक्ष्मीकरण तथा विविध जैविक प्रक्रियाओं की वैज्ञानिक समझ तक विस्तृत है। इन सभी कार्यों का अंतिम उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, कृषि एवं पर्यावरण में सुधार लाना है।
इस समूह को सूक्ष्मजैविकी, जैव प्रौद्योगिकी, औषध विज्ञान, विषाणु विज्ञान, भौतिकी एवं रसायन विज्ञान जैसे बहुविषयी क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त है।
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. ज्यूतिका राजवाडे
पदनाम : वैज्ञानिक - एफ
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
औद्योगिक सूक्ष्म जीव विज्ञान में स्नातकोत्तर पूरा करने के पश्चात्, मैंने एमएसीएस में डॉक्टरेट अध्ययन के लिए प्रवेश लिया और धातु-सूक्ष्मजीव पारस्परिक क्रियाओं पर कार्य किया। डॉक्टरेट अध्ययन के बाद, मैंने एआरआई में सीएसआईआर अनुसंधान सहयोगी और पुणे विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में शिक्षण अनुसंधान सहयोगी के रूप में काम किया। पिछले 13 वर्षों से, मैं नैनोजीवविज्ञान समूह में एक अनुसंधान वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हूँ। मैंने नैनोजीवविज्ञान में सूक्ष्म जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर कार्य किया है। पीएच.डी. शोधार्थियों के साथ कार्य करने से अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक जर्नलों में अनुसंधान प्रकाशन हुए हैं।
संपर्क :
02025325131 (दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- बी.एससी. (1989) सूक्ष्म जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणीशास्त्र
- एम.एससी. (1991) सूक्ष्म जीव विज्ञान
- पीएच.डी.।1997) सूक्ष्म जीव विज्ञान
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मेरा अनुसंधान नैनोमटेरियल्स के विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोगों से संबंधित है। जीवाणु रोगजनकों के नियंत्रण के लिए धातु-आधारित नैनोकणों की रोगाणुरोधी गतिविधि की खोज की गई। चांदी के नैनोकणों के जीवाणु जैवफिल्मों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन ट्रांसक्रिप्टोम स्तर पर किया गया। जलीय कृषि (aquaculture) में रोगों के शीघ्र पता लगाने के लिए, व्हाइट स्पॉट सिंड्रोम विषाणु और मैक्रोब्रेकियम रोसेनबर्गिनोडावायरस का पता लगाने के लिए लेटरल फ्लो परीक्षण प्लेटफॉर्म विकसित और सत्यापित किया गया। विब्रियोसिस का पता लगाने के लिए, क्रोमोजेनिक इम्यूनोसेंसर विकास के अधीन है। निदान के विकास में जैव-पहचान तत्वों के रूप में कई जैवअणुओं की खोज की जा रही है। नैनोजैव प्रौद्योगिकी में अनुप्रयोगों के लिए स्वाभाविक रूप से बनने वाली पॉलिमेरिक नैनो-संरचना, विशेष रूप से जीवाणु सेल्युलोज, की खोज की जा रही है। कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों के एक भाग के रूप में, नैनोपदार्थों की सूक्ष्म पोषक तत्व प्रेषण प्रणालियों के रूप में और जलीय कृषि में मौखिक टीकाकरण के लिए प्रोटीन प्रतिजन के वाहक के रूप में क्षमता का अन्वेषण किया जा रहा है।
List of Publications/ Patents/Varieties:
Papers published in refereed journals
- Mayattu K, Rajwade J, Ghormade V. Development of erythromycin loaded PLGA nanoparticles for improved drug efficacy and sustained release against bacterial infections and biofilm formation. MicrobPathog. 2024 Oct 23:107083. doi: 10.1016/j.micpath.2024.107083. Epub ahead of print. PMID: 39454804.
- S. Tawre, A. Padhye, S. Chakraborty, N. Kulkarni, G. Bose, S. Mittal, U. Jadhav, S. Jadhav, J.M. Rajwade, K. Pardesi, Bioactive Curcuma aromatica-stabilized silver nanoparticles embedded chitosan dressing with improved antibacterial, anti-inflammatory, and wound healing properties. Carbohydrate Polymer Technologies and Applications 8 (2024) 100570.
- Savardekar A, Fernandes E, Padhye-Pendse A, Gupta T, Pol J, Phadke M, Desai S, Jadhav S, Rajwade J, Banerjee A. Adipocytes Promote Endometrial Cancer Progression Through Activation of the SIRT1-HMMR Signaling Axis. Molecular Carcinogenesis. 2024 1002/mc.23815. Epub ahead of print. PMID: 39254492.
- Naik, A., A. A. Kale, J. M. Rajwade (2024) Sensing the future: A review on emerging technologies for assessing and monitoring bone health. Biomaterials Advances, 165, 214008, doi:10.1016/j.bioadv.2024.214008.
- MadiwalV,RajwadeJ.Silver-depositedtitaniumasaprophylactic’nanocoat’forperi-NanoscaleAdv.2024Mar7;6(8):2113-2128.
- Padhye-PendseA,UmraniR,PaknikarK,JadhavS,RajwadeJ.LifeSci.2024Jun15;347:122667.
- Deshpande,P.,Wankar,S.,Gumathannavar,R.,Kulkarni,S.,Jadhav,Y.,Patil,Y.,RajwadeJ.Kulkarni,(2024).Harnessingphotocurrentenhancementinsilver- bacterialcellulosenanocompositeforultra-sensitiveHg2+electrochemicaldetection.Nanocomposites,10(1),227–240.
- Madiwal,B.Khairnar,J.M.Rajwade(2024)Enhancedantibacterialactivityandsuperiorbiocompatibilityofcobalt-depositedtitaniumdiscsforpossibleuseinimplantdentistry,iScience,27(2),108827,doi:10.1016/j.isci.2024.108827.
- D.Khairnar,A.Jha,J.M.Rajwade(2023)Rationallydesignedcyclicpeptidesandnanomaterialsas‘next-generation’anti-amyloidtherapeutics.JMaterSci.58,9834– 9860.doi:10.1007/s10853-023-08654-6
- Deshpande,S.Wankar,S.Mahajan,Y.Patil,J.Rajwade,A.Kulkarni(2023)BacterialCellulose:NaturalBiomaterialforMedicalandEnvironmentalApplications,JournalofNaturalFibers,20:2,2218623
- D.Khairnar,A.Padhye,V.Madiwal,A.Jha,S.H.Jadhav,J.M.Rajwade.(2023)Cyclicβ-hairpinpeptideloadedPLGA nanoparticles:apotentialanti-amyloidtherapeutic.Materials Today Communications35:106322.doi.org/10.1016/j.mtcomm.2023.106322
- Kheur,S.;Kheur,M.;Madiwal,V.;Sandhu,R.;Lakha,T.;Rajwade,J.;Eyüboğlu,T.F.;Özcan,M.InVitroEvaluationofPhotofunctionalizedImplantSurfacesinaHighGlucoseMicroenvironmentSimulatingDiabetics.J.Funct.Biomater.2023,14,130.https://doi.org/10.3390/jfb14030130
- Kumar,S.S.,Jamalpure,S.,Ahmed,A.N.,Taju,G.,Vimal,S.,Majeed,S.A.,Suryakodi,S.,Rahamathulla,S.,Paknikar,K.M.,Rajwade,J.M.,&Hameed,A.(2022).AnIndigenous,Field-Deployable,LateralFlowImmunochromatographicAssayRapidlyDetectsInfectiousMyonecrosisinShrimp,Litopenaeusvannamei.MarineBiotechnology(NewYork,N.Y.),24(6):1110-1124.Doi:10.1007/s10126-022-10172-6.
- DamleA.,SundaresanR.,RajwadeJ.M.,SrivastavaP.,NaikA.2022.Aconcisereviewonimplicationsofsilvernanoparticlesinbonetissueengineering.BiomaterialsAdvances.141,213099
Book Chapters Published
- Rajwade, J. M., Kawle, K., Kulkarni, S., Kowshik, M., (2023). Wound Treatment Using Nanomaterials. Nanobiomaterials: Perspectives for Medical Applications in the Diagnosis and Treatment of Diseases, 145, 207-235.
- Introduction to Finfish Microbiome and Its Importance. (2023) Jyutika M. Rajwade, Snehal S. Kulkarni, Janhavi Vanjari in Microbiome of Finfish and Shellfish. Arvind Diwan, Sanjay N. Harke, Archana Panche (Eds). https://doi.org/10.1007/978-981-99-0852-3. Springer Singapore. Pages 3-33
- Rajwade J. M., “An overview of myconanoparticles applications in veterinary medicine” in Fungal Cell Factories for Sustainable Nanomaterials Production and Agricultural Applications. Kamel Abd-Elsalam (Ed). Elsevier. 2023. pp. 657-692. dorg/10.1016/B978-0-323-99922-9.00019-2
- Rajwade, J. M., Oak, M. D., &Paknikar, K. M. (2024). Copper-based nanofungicides: The next generation of novel agrochemicals. InNanofungicidesKamel Abd-Elsalam (Ed). (pp. 141-168). https://doi.org/0.1016/B978-0-323-95305-4.00008-X
- J. Rajwade, A. Padhye,S. S. Kulkarni, (2024) Two-Dimensional (2D) Materials for Bio-sensing Applications. In.Two-dimensional Hybrid Composites Synthesis, Properties and Applications. eBook. N. Talreja, D. Chauhan, M. Ashfaq (Eds). https://doi.org/10.1007/978-981-99-8010-9. Springer Singapore. Pp 227-258
- Rajwade J. M., Chikte R. G., N. Singh., Paknikar K. M. “Copper-based nanostructures: Antimicrobial properties against agri-food pathogens” in Copper Nanostructures: Next-Generation of Agrochemicals for Sustainable Agroecosystems. Kamel Abd-Elsalam (Ed). Elsevier. 2022. pp. 477-503. doi.org/10.1016/B978-0-12-823833-2.00031-3
Indian patents granted/filed
- A method for rapid isolation and purification of DNA.(No. 43488) June 2023. Inventors: M. K. Chaudhari, J. M. Rajwade, K. M. Paknikar
- Immunoassay,peptide-basedagentandfield-usablekitforearlyrapiddetectionofwhitespotsyndromevirus(No.393879).March2022.Inventors:P.K.Kulabhushan,J.M.Rajwade,K.M.Paknikar
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
- स्नेहल जमलपुरे : झींगे और झींगुरों को प्रभावित करने वाले विषाणुजन्य रोगजनकों /का पता लगाने के लिए पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स का विकास; मार्गदर्शक: डॉ. जे. एम. राजवाड़े
- वैभव मदिवाल : प्रत्यारोपण संबंधी विफलताओं को रोकने के लिए दंत सामग्री का नैनोस्केल सतही अनुसंधान । मार्गदर्शक: डॉ. जे. एम. राजवाड़े
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी :
डॉ. ज्यूतिका राजवाड़े को डीएसटी-वाइज स्कोप चयन समिति में 3 वर्षों के लिए सेवा हेतु नामित किया गया है।
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. धनंजय बोडस
पदनाम : वैज्ञानिक - एफ
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
भौतिकी में बुनियादी शिक्षा पूरी करने के बाद, मैंने माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में डॉक्टरेट थीसिस पूरा किया और पुणे विश्वविद्यालय से 2004 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। बाद में, मैं फ्रांस के रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदत्त पहले पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप के लिए फ्रांस चला गया। फेलोशिप अवधि पूरी होने पर, थोड़े समय के लिए, मुझे उसी प्रयोगशाला में अनुसंधान अभियंता के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसके बाद मैं इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइंजीनियरिंग एंड नैनोटेक्नोलॉजी, सिंगापुर में अनुसंधान वैज्ञानिक के रूप में चला गया।
हालांकि, 2006 में प्रतिष्ठित अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फाउंडेशन पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप प्राप्त करने से इनकार करना कठिन था, जिसने मुझे जर्मनी के इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोसिस्टम्स में मुख्यधारा के शैक्षणिक अनुसंधान में वापस ला दिया। भारत लौटने पर, मैंने बेंगलुरु स्थित एक स्टार्ट-अप बिगटेक प्राइवेट लिमिटेड में काम किया। हालांकि, शैक्षणिक अनुसंधान में गहरी रुचि के कारण, मैंने उद्योग पर शिक्षा जगत को चुना और पुणे विश्वविद्यालय के यंत्रविज्ञान विभाग में सह-प्राध्यापक के पद को चुना। वर्तमान में, मैं आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे, भारत में नैनो जीव विज्ञानसमूह में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हूँ।
संपर्क :
9120 2532 5127 (दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- 2000-2004पीएच.डी.माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्सइलेक्ट्रॉनिक विज्ञान विभाग, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पुणे
- 1997-1999एम.एससी. अनुप्रयुक्त भौतिकी, द महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा
- 1994-1997बी.एससी. भौतिकी, द महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मेरे अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न जैव-चिकित्सा सूक्ष्म उपकरणों के विकास के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
मेरे अनुसंधान का एक मजबूत अंतर-विषयक अंतरविषयक केंद्रित दृष्टिकोण है जो भौतिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनुप्रयुक्त रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और सूक्ष्म-निर्माण तकनीकों (Micro-fabrication techniques) (जिसमें परिष्कृत उपकरणों का संचालन शामिल है) के क्षेत्रों में सिद्धांत और व्यवहार को जोड़ता है। कुछ ऐसे विषयों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है जिन पर एक सामान्य प्लेटफॉर्म, यानी सूक्ष्म-द्रविकी (microfluidics), उच्च स्तर की रचनात्मकता और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ, गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना, कार्य किया गया है।
एक सूक्ष्म-द्रविकी उपकरण विकसित किया गया था जिसने क्वांटम डॉट्स का उपयोग करके जीवाणुओं का प्रकाशीय रूप से पता लगाने के लिए सूक्ष्मचैनल में चुंबकीय पृथक्करण को एकीकृत किया। यह संयोजन संवर्धन (enrichment) के समय को कम करता है और तेज संसूचन में सहायता करता है। यह संयोजन उत्तेजना प्रकाश स्रोत, समानांतर प्रकाशिकी, फिल्टर और फोटोडायोड जैसे कई घटकों का उपयोग संकेत (signal) का पता लगाने के लिए करता है। पहचान तत्व के रूप में पेप्टाइड के साथ संसूचन की सीमा (limit of detection), तक़रीबन 15 मिनट के परख समय के साथ 10 सीएफयू / एमएल पाई गई है
3-डी संवर्धित कोशिका संवर्धन: सूक्ष्म-द्रविकी-आधारित कोशिका संवर्धन में महत्वपूर्ण सुधार हमें जैविक रूप से प्रासंगिक कोशिका वातावरण बनाने के करीब ले जाएंगे और निकट भविष्य में पशु प्रयोगों को बदलने की उम्मीद है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम निहित सूक्ष्मचैनल के साथ 3-डी आधार संरचना (3D scaffolds) का निर्माण करना था। इस चिप में एक छिद्रयुक्त कक्ष और चैनल हैं, जो सभी एक आसान अपारंपरिक चरण में निर्मित किए गए हैं। गैर-संक्रमित (non-perfused) और संक्रमित (perfused) कोशिका संवर्धन दोनों के लिए इस चिप को प्रत्यास्थ (substrate) के रूप में उपयोग करने के लिए एक प्रणाली तैयार की गई थी।
नैनोकणों के संश्लेषण के लिए सूक्ष्म अभिक्रियक (miroreactor): अत्यधिक एकल-फैलाव धातु / अर्धचालक / पॉलिमर नैनोकणों को संश्लेषित करने के लिए एक सूक्ष्म अभिक्रियक को डिज़ाइन और निर्मित किया गया था। संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान अभिक्रिया गतिकी को समझने पर जोर दिया गया था। यह पाया गया कि सूक्ष्म आयतन और सटीक तापमान का उपयोग करके नैनोकणों को उच्च स्तर के नियंत्रण के साथ संश्लेषित किया जा सकता है।
वर्तमान में, मेरी प्रयोगशाला अनुसंधान के दो मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है:
- निदानिकी (diagnostics)
- ऑर्गन-ऑन-चिप का विकास।
List of Publications/ Patents/Varieties:
Publications
- P Suryavanshi, D Bodas, Knockout cancer by nano-delivered immunotherapy using perfusion-aided scaffold-based tumor-on-a-chip, Nanotheranostics, 8 (3) 2024 380-400.
- P Suryavanshi, Y Kudtarkar, M Chaudhari, D Bodas, Fabricating a low-temperature synthesized graphene-cellulose acetate-sodium alginate scaffold for the generation of ovarian cancer spheroid and its drug assessment, Nanoscale Advances, 5 (18) 2023 5045-5053.
- V Kamat, P Dey, D Bodas, A Kaushik, A Boymelgreen, S Bhansali, Active microfluidic reactor-assisted controlled synthesis of nanoparticles and related potential biomedical applications, J. Mater. Chem. B, 2023 11 2023 5650-5667.
- Sathe, D Bodas, Development and characterization of a polydimethylsiloxane-cellulose acetate hybrid membrane for application in organ-on-a-chip, Materials Science & Engineering B, 291 2023 116366.
- S Pandey, P Choudhary, S Jadhav, V Gajbhiye, D Bodas, In vivo imaging of prostate tumor targeted using folic acid conjugated quantum dots, Cancer Nanotechnology, 14 (30) 2023 1-11.
- Pandey, D Bodas, Exploiting the UV excited size-dependent emission of PDMS-coated CdTe quantum dots for in vitro simultaneous multicolor imaging of HepG2 cellular organelles, Materials Advances, 4 2023 1694.
- S Pandey, D Bodas, Effect of micro-impeller geometries on mixing in a continuous flowactive microreactor, Materials Science & Engineering B 283 2022 115843.
- S Thakare, A Shaikh, D Bodas and V Gajbhiye, Application of dendrimer-based nanosensors in immunodiagnosis, Colloids and Surfaces B: Biointerfaces 209 2022 112174.
Books Edited
- Bodas D, Gajbhiye V. 2024. Microfluidics-aided technologies: Platforms for the next generation biological applications. Academic Press. Elsevier
प्रदत्त भारतीय पेटेंट
- पेटेंट संख्या 438851 14 जुलाई 2023 डी. बोडस, पी. कुलकर्णी, ए. जाधव, एस. जाधव, पी. इंदे, ए. चौधरी, ए. देशपांडे, ए. ज़िंगाडे, एकीकृत संवेदकों (integrated sensors) सहित सूक्ष्म पादत्राण उपकरण
- पेटेंट संख्या 500353 17 जनवरी 2024 डी. बोडस, वी. कुलकर्णी, के. पाकनीकर , कोशिका संवर्धन और ऊतक इंजीनियरिंग के लिए 3डी छिद्रयुक्त मचान (3D porous scaffolds)
- पेटेंट संख्या 508723 08 फरवरी 2024 डी. बोडस, के. पाकनीकर , माइक्रोचिप-आधारित सुवाह्य वास्तविक-समय पॉलीमरेज़ श्रृंखला रिएक्टर (Microchip based portable real-time polymerase chain reactor)
- वाई. कर्पे, वी. गजभिए, डी. बोडस और पी. ढाकेफलकर, वायरल आरएनए, डीएनए, अन्य बायोमोलेक्यूल्स और उनके एक एस्से (assay) का पता लगाने के लिए न्यूक्लिक एसिड-आधारित परीक्षण किट। पेटेंट आवेदन संख्या 202121027919। अनुदान की तारीख 26-06-2024
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "पॉलीमर-लेपित प्रतिदीप्ति अर्धचालक नैनोक्रिस्टल" 413/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "जीवाणु का पता लगाने के लिए बैक्टीरियोफेज-आधारित माइक्रोफ्लुइडिक एस्से" 414/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- डी. बोडस, पी. कुलकर्णी, बी. जोशी, "पेपर-आधारित माइक्रोफ्लुइडिक्स द्वारा सीरम का पृथक्करण और कैमरा फोन का उपयोग करके आयरन के विभिन्न रूपों का आकलन" 416/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- डी. बोडस, गणितीय रूप से व्युत्पन्न प्रक्रिया पैरामीटर TEMP/E-1/41123/2022-MUM के तहत पॉलीमर-लेपित प्रतिदीप्ति अर्धचालक नैनोक्रिस्टल तैयार करने की एक प्रक्रिया
- वाई. कर्पे, वी. गजभिए, डी. बोडस और पी. ढाकेफलकर, "वायरल आरएनए, डीएनए, अन्य बायोमोलेक्यूल्स और उनके एक एस्से का पता लगाने के लिए न्यूक्लिक एसिड-आधारित परीक्षण किट" TEMP/E-1/31284/2021-MUM
- डी. बोडस और के. एम. पाकनीकर , "पीडीएमएस में सूक्ष्म संरचनाओं के निर्माण की विधि" 2782/MUM/2010
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "पॉलीमर-लेपित प्रतिदीप्ति अर्धचालक नैनोक्रिस्टल" 413/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "जीवाणु का पता लगाने के लिए बैक्टीरियोफेज-आधारित माइक्रोफ्लुइडिक एस्से" 414/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "रोगजनकों का पता लगाने के लिए माइक्रोफ्लुइडिक बायोसेन्सर" 415/MUM/2014।
- डी. बोडस, पी. कुलकर्णी, बी. जोशी, "पेपर-आधारित माइक्रोफ्लुइडिक्स द्वारा सीरम का पृथक्करण और कैमरा फोन का उपयोग करके आयरन के विभिन्न रूपों का आकलन" 416/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- वी. कुलकर्णी, डी. बोडस, के. एम. पाकनीकर , "कोशिका संवर्धन और ऊतक इंजीनियरिंग के लिए 3डी छिद्रयुक्त मचान" 417/MUM/2014।
- डी. बोडस और के. एम. पाकनीकर , "माइक्रोचिप-आधारित सुवाह्य वास्तविक-समय पॉलीमरेज़ श्रृंखला रिएक्टर" E1/2763/2016MUM।
- वाई. कर्पे, वी. गजभिए, डी. बोडस और पी. ढाकेफलकर, वायरल आरएनए, डीएनए, अन्य बायोमोलेक्यूल्स और उनके एक एस्से का पता लगाने के लिए न्यूक्लिक एसिड-आधारित परीक्षण किट। पेटेंट आवेदन संख्या 202121027919। अनुदान की तारीख 26-06-2024
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "पॉलीमर-लेपित प्रतिदीप्ति अर्धचालक नैनोक्रिस्टल" 413/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
- एस. अग्रवाल, के. एम. पाकनीकर और डी. बोडस, "जीवाणु का पता लगाने के लिए बैक्टीरियोफेज-आधारित माइक्रोफ्लुइडिक एस्से" 414/MUM/2014। प्रदत्त (GRANTED)
पेटेंट आवेदन:
- एस. पाण्डेय, और डी. बोडस, गणितीय रूप से व्युत्पन्न प्रक्रिया पैरामीटर के तहत पॉलीमर-लेपित प्रतिदीप्ति अर्धचालक नैनोक्रिस्टल तैयार करने की एक प्रक्रिया TEMP/E-1/41123/2022-MUM
- पॉलीमर-लिपिड हाइब्रिड झिल्ली का विकास और उसका अनुप्रयोग E-11/1073/2024/MUM)
- लंग-ऑन-ए-चिप में अनुप्रयोग के लिए ऑन-चिप मॉडल का विकास TEMP/E-1/104082/2024-MUM)
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
सुलाक्षणा पांडेय : बायोइमेजिंग में अनुप्रयोग के लिए माइक्रोरेएक्टर का उपयोग करके बहु-रंग क्वांटम कुशल प्रतिदीप्त नैनोक्रिस्टल का संश्लेषण।मार्गदर्शक: डॉ. डी.एस. बोडस
नाम : डॉ. वंदना घोरमाडे
पदनाम : वैज्ञानिक –एफ
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
डॉ. वंदना घोरमाडे , नैनो जीव विज्ञान समूह में वैज्ञानिक 'ई',अपने अनुसंधान को प्रेषण (delivary), निदान और चिकित्सा विज्ञान के लिए नैनोविज्ञान के संभावित अनुप्रयोगों पर केंद्रित करती हैं। उन्होंने एग्रोस्कोप रेकेनहोल्ज़-टैनिकॉन रिसर्च स्टेशन ए.आर.टी., ज्यूरिक, स्विट्जरलैंड से अपनी पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप पूरी करने के बाद 2007 से नैनो जीव विज्ञान में काम कर रही हैं। उन्हें राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे में सीएसआईआर-रिसर्च एसोसिएटशिप से सम्मानित किया गया था। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे से अपना डॉक्टरेट (पीएच.डी. ) प्राप्त किया। वह पुणे विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में अपनी मास्टर्स (एम्. एससी.) में स्वर्ण पदक विजेता थीं।
शैक्षणिक योग्यता
- 1996-2000,पीएच.डी. जैव प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे विश्वविद्यालय, भारत
- 1989, एम.एससी.वनस्पति विज्ञान, पुणे विश्वविद्यालय, भारत; (स्वर्ण पदक)
- बी.एससी. (ऑनर्स), दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत
थीसिस का शीर्षक : बेंजामिनीएला पॉइट्रासीमें द्विरूपता: आकृतिजनन (morphogenesis) के अध्ययन और कवकरोधी अभिकर्ताओं की जाँच के लिए एक मॉडल (पर्यवेक्षक - डॉ. एम.वी. देशपांडे, राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे।
पुरस्कार
- 2015 में महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी के फेलो के रूप में चयनित
- 2005 में गुमान देवी वर्मा सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक, भारतीय कवक विज्ञान एवं पादप रोग विज्ञान सोसायटी
- 2001 में सी.एस.आई.आर.-अनुसंधान सहकारिता
- 2001 में सर्वश्रेष्ठ वक्ता, कवक विविधता और जैव प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय सम्मेलन, के.वी. पेंढारकर कॉलेज, मुंबई।
- 2000में सर्वश्रेष्ठ वक्ता, पादप और सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकी के मूल और अनुप्रयुक्त पहलुओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, मॉडर्न कॉलेज, पुणे।
- 1998में द्वितीय पुरस्कार, स्वर्ण जयंती अनुसंधान छात्र संगोष्ठी, पुणे विश्वविद्यालय।
- 1996 में सी.एस.आई.आर.-अनुसंधान अध्येतावृत्ति।
- 1989 में स्वर्ण पदक, एम.एससी. ,पुणे विश्वविद्यालय।
- 1989 में स्वर्गीय मिलिंद गांधी छात्रवृत्ति, पुणे विश्वविद्यालय।
अनुसंधान अभिरुचियाँ
- नैनो प्रौद्योगिकी में स्वास्थ्य सेवा, कृषि और पर्यावरण में नैनो स्तर पर सामग्री, उपकरणों या प्रणालियों का निर्माण और उपयोग शामिल है। मेरा प्राथमिकता वाला अनुसंधान प्रेषण, निदान और चिकित्सा के लिए नैनोविज्ञान के संभावित अनुप्रयोगों पर केंद्रित है।
- कीटनाशकों के कारण होने वाले पारिस्थितिक क्षरण (ecological degradation) और प्रतिरोध के विकास को कीटों के लिए वैकल्पिक जैव नियंत्रण रणनीतियों द्वारा कम किया जा सकता है। RNAi के लिए प्रेषण प्रणाली के रूप में नैनोकणों का उपयोग करने वाले एक नए दृष्टिकोण का अध्ययन हेलिकोवर्पा, स्पोडोप्टेरा और थ्रिप्स के विरुद्ध इन-विट्रो कोशिका रेखा के अध्ययनों और इन-वीवो कीट जैव परख में लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA) के उन्नत अवशोषण और बेहतर स्थायित्व के लिए किया जा रहा है।
- मानव स्वास्थ्य-देखभाल के मामले में, रोग-प्रतिरक्षा अक्षम (immunocompromized) व्यक्तियों में एस्पर्जिलोसिस और कैंडिडिआसिस जैसे अवसरवादी कवकीय संक्रमणों की व्यापकता बढ़ती जा रही है। पारंपरिक निदान विधियों की सीमाओं और कवकरोधी के प्रति प्रतिवेदित प्रतिरोध के कारण शीघ्र पहचान और चिकित्सा एक चुनौती पेश करती है। हमने आक्रामक एस्पर्जिलोसिस (invasive) के निदान के लिए बहुलक प्रतिरक्षाप्रोटीन (Polyclonal Antibodies) के संयोजन में सोने के नैनोकणों का उपयोग करके प्रतिजन गैलेक्टोमैनन के लिए प्वाइंट-ऑफ-केयर, रैपिड लैटरल फ्लो परीक्षण और ईएलआईएसए (ELISA) प्रारूप विकसित किए हैं।
- कवकीय विषाक्त पदार्थ और अन्य रोगजनक कवक के लिए पहचान प्लेटफॉर्मों को पेप्टाइड्स, एप्टामर्स जैसे पहचान अणुओं का उपयोग करके सोने के नैनोकणों से संयुग्मित किया जा रहा है। पॉलीमर कोटेड क्वांटम डॉट्स (सुदृढ़, प्रकाशस्थिर, प्रतिदीप्त नैनोकण) के साथ जैव‑चित्रण (bio-imaging)।
- कैंसर के विरुद्ध अतिताप उपचार (hyperthermia treatment) और औषधि प्रेषण के लिए पॉलीमर स्थिर चुंबकीय नैनोकणों (polymer stabilized nano particles) का अनुप्रयोग।
- कवकीय संक्रमणों के उपचार के लिए एम्फोटेरिसिन बी का नैनोफॉर्मूलेशन विषाक्तता, घुलनशीलता और प्रतिरोध की समस्याओं को दूर करने के लिए पेटेंट कराया गया है।
- रक्तस्राव रोकने के लिए रैपिड हेमोस्टेटिक बैंडेज का पेटेंट कराया गया है जो बेहतर उत्तरजीविता दर और घटी हुई अक्षमता के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती होने की लागत में योगदान दे सकता है।
List of Publications/ Patents/Varieties:
Papers published in refereed journals
- Mayattu K, Rajwade J, Ghormade V. Development of erythromycin loaded PLGA nanoparticles for improved drug efficacy and sustained release against bacterial infections and biofilm formation. MicrobPathog. 2024 Oct 23:107083. doi: 10.1016/j.micpath.2024.107083. Epub ahead of print. PMID: 39454804.
- Gokul Patil, Rutuja Pawar, Vandana Ghormade. Investigation of platelet activation and calcium store release by a topical hemostatic xerogel dressing for improved blood clotting J Appl Polym Sci. 2024;e55194.
- Kamal Mayattu, Vandana Ghormade 2024, Controlled delivery of nikkomycin by PEG coated PLGA nanoparticles inhibits chitin synthase to prevent growth of A. flavus and A. fumigatus. ZNC J Biosci (IF 1.8)
- Kamal and Vandana Ghormade 2023, Evaluation of Silver Nanoparticles for Antifungal Activity Against the Human Fungal Pathogen – Candida albicansKavaka 59 (4): 24-31
- Shraddha Rahi, Vikram Lanjekar, Vandana Ghormade (2023) Rationally designed peptide conjugated to gold nanoparticles for detection of aflatoxin B1 in point-of-care dot-blot assay. Food Chem 413 (2023) 135651
- Henry Kolge, Gokul Patil, Sachin Jadhav Vandana Ghormade (2023) A pH-tuned chitosan-PLGA nanocarrier for fluconazole delivery reduces toxicity and improves efficacy against resistant Int J Biol Macromol 227 (2023) 453–461 B
- Henry Kolge, Kartiki Kadam, Vandana Ghormade (2023) Chitosan nanocarriers mediated dsRNA delivery in gene silencing for Helicoverpaarmigera PesticBiochemPhysiol 189 (2023) 105292
- Gokul Patil, Rutuja Pawar, Sachin Jadhav and VandanaGhormade 2022, A chitosan based multimodal “soft” hydrogel for rapid hemostasis of non-compressible hemorrhages and its mode of action. Carbohydr Polym Technol Appl 4: 100237
- Bhoomika M. Karamchandani, Priya A. Maurya, Sunil G. Dalvi, Samadhan Waghmode, Deepansh Sharma, Pattanathu K. S. M. Rahman, Vandana Ghormade and Surekha K. Satpute (2022) Synergistic Activity of Rhamnolipid Biosurfactant and Nanoparticles Synthesized Using Fungal Origin Chitosan Against Phytopathogens. Front. Bioeng. Biotechnol. 10:917105. doi: 10.3389/fbioe.2022.917105
Book chapters published
- Vandana Ghormade, Vaidehi Bhagwat, Deepali Choudhary, Maheshwari G., and Shivangi Singh. Nanotechnology Interventions for Improved Pesticide and Fertilizer delivery. In:’Nano-Agri-Input Products in Agriculture and Environmental Protection” (eds. .C. Tarafdar, Deepak Kumar, Sanjay K. Singh, K.P. Singh) published by “Apple Academic Press, partnered with CRC Press, a member of the Taylor & Francis Group”. (2023)
- V Ghormade (2022) Nanosensors for detection of Human Fungal Pathogens. In: Nanotechnologies for Infectious Diseases, Editors, S Hameed and S Rehman. Springer Nature, Singapore pp 499-519
विदेशी/भारतीय पेटेंट प्रदत्त
- एक छिपे हुए पेलोड के प्रेषण के लिए नैनोवाहक, इसकी तैयारी की विधि, और इसके अनुप्रयोग। पेटेंट संख्या 458152; अनुदान की तिथि : अक्टूबर 11, 2023 वंदना घोरमाडे, वीरेंद्र गजभिए, के. एम. पाकनिकर
- तीव्र रक्तस्तम्भन के लिए काइटोसन-आधारित ड्रेसिंग (पेटेंट संख्या 435691) वंदना घोरमाडे
विदेशी/भारतीय पेटेंट (आवेदन दाखिल किये गए):
- कवकीय विषाक्त पदार्थों के संदूषण की विशिष्ट पहचान और मल्टीप्लेक्स डिटेक्शन के लिए तर्कसंगत रूप से डिजाइन किए गए पेप्टाइड्स। (संख्या. 202221021409) वंदना घोरमाडे
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
श्रद्धा राही : खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कवकीय विषाक्त पदार्थों की तीव्र पहचान; गाइड: डॉ. वंदना घोरमाडे
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. वीरेंद्र गजभिए
पदनाम : वैज्ञानिक –ई
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
डॉ. वीरेंद्र गजभिये पिछले 15 वर्षों से नैनो चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने औषधी विज्ञान में अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधी प्राप्त की। उनके पास औषधी विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधी (पीएच.डी.) है।
उन्होंने विस्कॉन्सिन इंस्टीट्यूट फॉर डिस्कवरी, डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन, मैडिसन (WI, USA) और डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी, पोर्टलैंड (OR, USA) में पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान का अनुभव प्राप्त किया।
दिसंबर 2013 से, वह आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे, भारत में नैनो चिकित्सा में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने विशेष रूप से पॉलीमरिक नैनोकणों जिनमें डेंड्रिमर और मेसोपोरस सिलिका नैनोकण शामिल हैं, के साथ व्यापक रूप से कार्य किया है।
वर्तमान में, उनकी अनुसंधान रुचियाँ मुख्य रूप से विभिन्न कैंसरों के उपचार और हृदय मरम्मत तथा पुनर्जनन के लिए न्यूक्लिक अम्ल चिकित्सा का उपयोग करके नैनोप्रौद्योगिकी-आधारित जीन उपचार के विकास में निहित हैं।
संपर्क :
+91-20-25325140(दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- बैचलर ऑफ फार्मेसी (2004): राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)।
- मास्टर ऑफ फार्मेसी (2007; ऑनर्स): डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.)।
- पीएच.डी. औषधि विज्ञान में (2011): डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.)।
- पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च एसोसिएट (2012): विस्कॉन्सिन इंस्टीट्यूट फॉर डिस्कवरी, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन, मैडिसन (डब्ल्यूआई, यूएसए)।
- पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च एसोसिएट (2013): बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग, ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी, पोर्टलैंड (ओआर, यूएसए)।
अनुसंधान अभिरुचियाँ
नैनोचिकित्सा, लक्षित औषधि/ लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA)/माइक्रोआरएनए/एसएसओ प्रेषण, नैनो-प्रतिरक्षा संवेदक, ऊतक अभियांत्रिकी, पुनर्योजी नैनोचिकित्सा, डेंड्राइमर एवं मेसोपोरस सिलिका नैनोकणों का जैव-चिकित्सीय अनुप्रयोग, जैव-पदार्थ, एक-अणु माइसेल्स एवं प्रतिचित्रण, बहु-कार्यात्मक पॉलिमरिक नैनोकण, नैनो-निदान-उपचार (Nanotheranostics), न्यूक्लिक अम्ल चिकित्सा, जीन चिकित्सा
List of Publications/ Patents/Varieties:
Papers published in refereed journals
- Deshmukh , N. S. Pathan , N. Haldar , S. Nalawade , M. Narwade , K. R. Gajbhiye, V. Gajbhiye. (2025) Exploring intranasal drug delivery via nanocarriers: A promising glioblastoma therapy. Colloids and Surfaces B: Biointerfaces, 245: 114285
- Shaikh, A., P. Kesharwani, and V. Gajbhiye, “Dendrimer as a momentous tool in tissue engineering and regenerative medicine,” J. Control. Release, vol. 346, no. January, pp. 328–354, 2022, doi: 10.1016/j.jconrel.2022.04.008. IF – 11.467
- Narwade, A. Shaikh, K. R. Gajbhiye, P. Kesharwani, and V. Gajbhiye, “Advanced cancer targeting using aptamer functionalized nanocarriers for site-specific cargo delivery,” Biomater. Res., vol. 27, no. 1, p. 42, May 2023, doi: 10.1186/s40824-023-00365-y. IF – 11.3
- Salve, R., Haldar, N., Shaikh, A., Samanta, R., Sengar, D., Patra, S., et al. (2024). MUC1 aptamer-tethered H40-TEPA-PEG nanoconjugates for targeted siRNA-delivery and gene silencing in breast cancer cells. Front. Bioeng. Biotechnol. 12, 1–8. doi: 10.3389/fbioe.2024.1383495. IF – 4.3
- Salve, R., Kumar, P., Chaudhari, B. P., and Gajbhiye, V. (2023). Aptamer tethered bio-responsive mesoporous silica nanoparticles for efficient targeted delivery of paclitaxel to treat ovarian cancer cells. J. Pharm. Sci. 000, 1–10. doi: 10.1016/j.xphs.2023.01.011. IF – 3.7
- Gajbhiye, K. R., Salve, R., Narwade, M., Sheikh, A., Kesharwani, P., and Gajbhiye, V. (2023). Lipid polymer hybrid nanoparticles: a custom-tailored next-generation approach for cancer therapeutics. Mol. Cancer 22, 1–44. doi: 10.1186/s12943-023-01849-0. IF – 27.7
- Deshmukh, V., Pathan, N.S., Haldar, N., Nalawade, S., Narwade, M., Gajbhiye, K.R. and Gajbhiye, V., 2024. Exploring intranasal drug delivery via nanocarriers: A promising glioblastoma therapy. Colloids and Surfaces B: Biointerfaces, p.114285. IF – 5.4
- Korake, S., Salve, R., Gajbhiye, V. and Pawar, A., 2024. αvβ3 integrin-targeted pH-responsive dendritic nanocarriers for enhanced anti-tumor efficacy of docetaxel against breast cancer. Journal of Drug Delivery Science and Technology, 99, p.105946. IF – 4.5
- Varghese, S., Jisha, M.S., Rajeshkumar, K.C., Gajbhiye, V., Alrefaei, A.F. and Jeewon, R., 2024. Endophytic fungi: A future prospect for breast cancer therapeutics and drug development. Heliyon. IF – 3.4
- Salve, R., Haldar, N., Shaikh, A., Samanta, R., Sengar, D., Patra, S. and Gajbhiye, V., 2024. MUC1 aptamer-tethered H40-TEPA-PEG nanoconjugates for targeted siRNA-delivery and gene silencing in breast cancer cells. Frontiers in Bioengineering and Biotechnology, 12, p.1383495. IF – 4.3
- Varghese, S., Jisha, M.S., Rajeshkumar, K.C., Gajbhiye, V., Haldar, N. and Shaikh, A., 2024. Molecular authentication, metabolite profiling and in silico–in vitro cytotoxicity screening of endophytic Penicillium ramusculum from Withaniasomnifera for breast cancer therapeutics. 3 Biotech, 14(3), p.64. IF – 2.6
- Kumar, P., Salve, R., Paknikar, K.M. and Gajbhiye, V., 2023. Nucleolin aptamer conjugated MSNPs-PLR-PEG multifunctional nanoconstructs for targeted co-delivery of anticancer drug and siRNA to counter drug resistance in TNBC. International Journal of Biological Macromolecules, 229, pp.600-614. IF – 7.7
- Kesharwani, P., Sheikh, A., Abourehab, M.A., Salve, R. and Gajbhiye, V., 2023. A combinatorial delivery of survivin targeted siRNA using cancer selective nanoparticles for triple negative breast cancer therapy. Journal of Drug Delivery Science and Technology, 80, p.104164. IF – 4.5
- Fotooh Abadi, L., Kumar, P., Paknikar, K., Gajbhiye, V. and Kulkarni, S., 2023. Tenofovir-tethered gold nanoparticles as a novel multifunctional long-acting anti-HIV therapy to overcome deficient drug delivery-: an in vivo proof of concept. Journal of Nanobiotechnology, 21(1), p.19. IF – 10.6
- Moudgil, A., Salve, R., Gajbhiye, V. and Chaudhari, B.P., 2023. Challenges and emerging strategies for next generation liposomal based drug delivery: an account of the breast cancer conundrum. Chemistry and Physics of Lipids, 250, p.105258. IF – 3.4
- Kesharwani, P., Fatima, M., Singh, V., Sheikh, A., Almalki, W.H., Gajbhiye, V. and Sahebkar, A., 2022. Itraconazole and difluorinated-curcumin containing chitosan nanoparticle loaded hydrogel for amelioration of onychomycosis. Biomimetics, 7(4), p.206. IF – 3.4
- Tiwari, A., Gajbhiye, V., Jain, A., Verma, A., Shaikh, A., Salve, R. and Jain, S.K., 2022. Hyaluronic acid functionalized liposomes embedded in biodegradable beads for duo drugs delivery to oxaliplatin-resistant colon cancer. Journal of Drug Delivery Science and Technology, 77, p.103891. IF – 4.5
- Shaikh, A., Kesharwani, P. and Gajbhiye, V., 2022. Dendrimer as a momentous tool in tissue engineering and regenerative medicine. Journal of Controlled Release, 346, pp.328-354. IF – 10.5
- More, N.A., Jadhao, N.L., Meshram, R.J., Tambe, P., Salve, R.A., Sabane, J.K., Sawant, S.N., Gajbhiye, V. and Gajbhiye, J.M., 2022. Novel 3-fluoro-4-morpholinoaniline derivatives: Synthesis and assessment of anti-cancer activity in breast cancer cells. Journal of Molecular Structure, 1253, p.132127. IF – 4.0
Book chapters published
- Kadu, M., Salve, R., Gajbhiye, K.R., Choudhary, R.K. and Gajbhiye, V., 2023. Nanoparticle-Mediated Plant Bioactives for Cardiovascular Disease. In Advances in Phytonanotechnology for Treatment of Various Diseases (pp. 199-213). CRC Press.
- Kadu, M., Salve, R., Gajbhiye, K.R., Choudhary, R.K. and Gajbhiye, V., 2023. Historical Perspectives and Advances in Phytonanotechnology. Advances in Phytonanotechnology for Treatment of Various Diseases, pp.1-20.
- Haldar, N., Salve, R., Gajbhiye, K.R. and Gajbhiye, V., 2023. Delivery of Antimalarial Phytochemicals by Nanoscale Approaches. In Advances in Phytonanotechnology for Treatment of Various Diseases (pp. 287-305). CRC Press.
- Gajbhiye, K.R., Dhapte, V., Varma, S., Chaudhari, B.P. and Gajbhiye, V., 2022. Redox-responsive nanomedicine for breast cancer therapy. In Targeted Nanomedicine for Breast Cancer Therapy (pp. 407-439). Academic Press.
- Moudgil, A., Jaiswal, N., Gajbhiye, K.R., Gajbhiye, V., Pawar, A.T. and Chaudhari, B.P., 2022. Hypoxia mediated targeted nanomedicine for breast cancer. In Targeted Nanomedicine for Breast Cancer Therapy (pp. 369-406). Academic Press.
- Sayed-Pathan, N.I., Jadon, R.S., Gajbhiye, K.R. and Gajbhiye, V., 2022. Tailored gold nanoparticles for improved control over drug release. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 283-318). Academic Press.
- Poudel, I., Annaji, M., Arnold, R.D., Gajbhiye, V., Tiwari, A.K. and Babu, R.J., 2022. Vesicular nanocarrier based stimuli-responsive drug delivery systems. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 61-86). Academic Press.
- Kumar, P., Salve, R., Gajbhiye, K.R. and Gajbhiye, V., 2022. An overview of stimuli-responsive nanocarriers: State of the art. Stimuli-Responsive Nanocarriers, pp.1-27.
- Salve, R., Kumar, P., Gajbhiye, K.R., Shende, R.A., Chaudhari, B.P. and Gajbhiye, V., 2022. Mesoporous silica nanoparticles-based stimuli-triggered drug release systems. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 237-264). Academic Press.
- Jadon, R.S., Jadon, P.S., Bhadauria, V., Sharma, V., Bharadwaj, S., Sharma, M., Gajbhiye, K.R. and Gajbhiye, V., 2022. Solid–lipid nanoparticles based vehicles for stimuli inspired delivery of bioactives. In Stimuli-responsive nanocarriers (pp. 265-282). Academic Press.
- Salve, R., Gajbhiye, K.R., Babu, R.J. and Gajbhiye, V., 2022. Carbon nanomaterial-based stimuli-responsive drug delivery strategies. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 367-392). Academic Press.
- Moudgil, A., Shende, R.A., Pawar, A.T., Gajbhiye, K.R., Gajbhiye, V. and Chaudhari, B.P., 2022. Quantum dots based vehicles for controlled drug release in conjunction with bio-imaging. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 197-236). Academic Press.
- Narwade, M., Gajbhiye, V. and Gajbhiye, K.R., 2022. Protein nanocapsules as a smart drug delivery platform. In Stimuli-Responsive Nanocarriers (pp. 393-412). Academic Press.
Books Edited
- Advances in Phytonanotechnology for Treatment of Various Diseases. Prashant Kesharwani, Virendra Gajbhiye. Publication date:- 2023/9/29. Publisher:- CRC Press. ISBN 9781032137469.
- Stimuli-Responsive Nanocarriers: Recent Advances in Tailor-Made Therapeutics. Virendra Gajbhiye, Kavita Gajbhiye, Seungpyo Hong (Eds.) Academic Press. 1st Edition – January 4, 2022. Elsevier. USA. Paperback ISBN: 9780128244562
- Bodas D, Gajbhiye V. 2024. Microfluidics-aided technologies: Platforms for the next generation biological applications. Academic Press. Elsevier
भारतीय पेटेंट प्रदत्त
- नैनोकेरियर: संलग्न पेलोड के प्रेषण हेतु, उसकी तैयारी की विधि तथा उसके अनुप्रयोग। पेटेंट सं. 458152; स्वीकृति तिथि: 11 अक्टूबर 2023 आविष्कारक: वंदना घोरमड़े, वीरेन्द्र गजभिए, के. एम. पाकनीकर
- न्यूक्लिक अम्ल-आधारित परीक्षण किट: वायरल आरएनए, डीएनए, अन्य जैव-अणुओं का पता लगाने तथा उनके परीक्षण हेतु। पेटेंट आवेदन सं. 202121027919; स्वीकृति तिथि: 26 जून 2024 आविष्कारक: वाई. कर्पे, वी. गजभिए, डी. बोडस, पी. ढ़ाकेफ़लक
पेटेंट (आवेदन दाखिल किये गए):
एंडोफाइटिक पेनिसिलियम सेटोसुम एसवीडब्ल्यूएस1 से व्युत्पन्न स्तन कैंसर उपचार हेतु कैंसर-रोधी यौगिक। पेटेंट आवेदन सं. 202421003897
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
राजेश साल्वे : मेटास्टेटिक अंडाशय (ovarian) कैंसर के विरुद्ध प्रभावी चिकित्सीय परिणाम हेतु लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNAs)का लक्षित सह-प्रेषण। मार्गदर्शक: डॉ. वी. गजभिए
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- डॉ. वी. गजभिए महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी के निर्वाचित फेलो हैं। फेलोशिप सं. ELF1196
- व्यावसायिक उत्कृष्टता पुरस्कार: रोटरी क्लब, पुणे द्वारा नैनोप्रौद्योगिकी एवं उसके स्वास्थ्य अनुप्रयोगों में अनुसंधान योगदान हेतु।
- कंट्रोल रिलीज़ सोसाइटी (सीआरएस, भारतीय अध्याय): द्वितीय सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार 2023, नगद पुरस्कार ₹25,000।
- डॉ. वीरेन्द्र गजभियए स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में लगातार चौथे वर्ष सम्मिलित।
- मुख्य वक्तव्य (कीनोट टॉक): “लक्षित औषधि/लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA)प्रेषण हेतु बहु-स्तरीय नैनोसंरचनाएँ” 3rd International Conference on Materials Science and Engineering 26–27 सितम्बर 2024, एम्स्टर्डम, नीदरलैण्ड्स
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. मोनाली रहालकर
पदनाम : वैज्ञानिक –ई
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी पीएचडी जर्मनी के कॉनस्टैंज़ विश्वविद्यालय से पूरी की, जहाँ मैंने कॉन्सटैंज़ झील से मेथेन ऑक्सीकारक जीवाणुओं का अध्ययन किया। अपने पोस्टडॉक्टोरल कार्य के दौरान, मैंने ब्रेमेन विश्वविद्यालय में धान की जड़ों से जुड़े नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणुओं पर कार्य किया।
मैंने इस संस्थान में सितंबर 2013 में अपना कार्य आरंभ किया, और मेरा मुख्य ध्यान नए (नॉवेल) और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीवों के अध्ययन, पृथक्करण और संवर्धन पर है। मेरी टीम वर्तमान में विभिन्न वातावरणों में मौजूद ‘मेथैनोट्रॉफ’ या मेथेन ऑक्सीकारक जीवाणुओं पर केंद्रित है। मेथैनोट्रॉफ मेथेन का ऑक्सीकरण करते हैं और पर्यावरण में मेथेन ऑक्सीकरण का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वे सी 1 यौगिकों को अपने कार्बन और ऊर्जा के एकमात्र स्रोत के रूप में उपयोग करते हैं। ये मेथेन के प्राकृतिक जैव-फिल्टर के रूप में कार्य करते हैं और मेथेन उपशमन में सहायक होते हैं।
मैंने भारतीय (उष्णकटिबंधीय) धान के खेतों से मेथैनोट्रॉफ पर कार्य करना शुरू किया, जो मेथैनोट्रॉफ के प्रमुख हॉटस्पॉटों में से एक हैं। हम विभिन्न मेथैनोट्रॉफों के संवर्धन में सफल रहे हैं, जिसमें कई नए टैक्सा भी शामिल हैं। इन मेथैनोट्रॉफों का जैव-ऊर्जा और जैव-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अन्वेषण किया जाएगा। हम विभिन्न नए प्रजातियों की जीनोमिक्स की भी खोज कर रहे हैं। हम इन-सीटू समुदायों का अध्ययन करने के लिए मेटाजिनोमिक्स जैसे विभिन्न दृष्टिकोणों का भी उपयोग करते हैं।
संपर्क :
0091-020-25325119 (दूरभाष)
रिसर्च गेट: https://www.researchgate.net/profile/Monali_Rahalkar2Twitter@MonaRahalkar
शैक्षणिक योग्यता
- बी.एससी. (सूक्ष्म जीव विज्ञान) - 1997 प्रथम श्रेणी, पुणे विश्वविद्यालय में द्वितीय रैंक (सूक्ष्म जीव विज्ञान)
- एम.एससी. (सूक्ष्म जीव विज्ञान) - 1999 विशिष्टता के साथ प्रथम श्रेणी, पुणे विश्वविद्यालय में षष्ठम रैंक (सूक्ष्म जीव विज्ञान)
- पीएचडी (सूक्ष्मजीव पारिस्थितिकी) - 2007 कॉनस्टैंज़ विश्वविद्यालय, कॉनस्टैंज़, जर्मनी (अनुसंधान निर्देशक: प्रो. बर्नहार्ड शिंक)
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मिथेनोट्रॉफ्स (मिथेन ऑक्सीकरण करने वाले जीवाणु): विविधता, संवर्धन एवं जीनोमिक्स
- वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन जीव जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण खतरों में से एक है। मिथेन, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) केबाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस है तथा इसका वैश्विक ऊष्मन क्षमता कार्बन डाइऑक्साइडसेअधिकहै।मिथेनकाप्राकृतिकऑक्सीकरणमिथेनोट्रॉफ्सद्वाराकियाजाताहै, जो मिथेन को कार्बन एवं ऊर्जा के एकमात्र स्रोत के रूप में उपयोग करते हैं।
- मेरा वर्तमान अनुसंधानकार्य मिथेनोट्रॉफ्स पर केन्द्रित है। हम इनके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं, जैसे—विभिन्न आवासों में इनकी विविधता, मिथेनोट्रॉफ्स का संवर्धन, संवर्धनों का वर्णन तथा जैव-ऊर्जा एवं जैव-प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में इनके अनुप्रयोगों की जाँच।
- भारत में हम प्रथम प्रयोगशाला हैं जिसने 50 से अधिक शुद्ध मिथेनोट्रॉफिक जीवाणु उपजातियों (pure strains) का संवर्धन किया है। ये पृथक उपजातियाँ नौ विभिन्न वंशों (genera) से संबंधित हैं, जिनमें से दो नवीन वंश (मेथाइलोक्यूकुमिस और मेथाइलोलोबस) का वर्णन हमारे द्वारा भारत से किया गया है। हमारा विश्वास है कि यह भारत में मिथेनोट्रॉफिक जीवाणुओं का प्रथम संवर्धन-संग्रह है। इन सभी मिथेनोट्रॉफिक उपजातियों का उपयोग विविध जैव-ऊर्जा, जैव-प्रौद्योगिकीय एवं पर्यावरणीय अनुप्रयोगों में किया जा रहा है, जिनमें विभिन्न स्रोतों से मिथेन शमन, गैस से तरल जैव-ईंधन उत्पादन, एककोशिकीय प्रोटीन उत्पादन आदि सम्मिलित हैं।
मिथेन शमन में मिथेनोट्रॉफ्स
- हम धान के खेतों एवं अपशिष्ट-भराव स्थलों (landfills) में मिथेन शमन हेतु मिथेनोट्रॉफ्स को नवीन जैव-बीजाणु संवर्धक (bio-inoculants) के रूप में प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हम जैव-उत्तेजन द्वारा स्थानीय मिथेनोट्रॉफ संख्या को सक्रिय करने का प्रयास करेंगे, जिससे इन स्रोतों से ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाई जा सके। हमारा आगे का ध्यान अपशिष्ट-भराव स्थलों से मिथेनोट्रॉफ्स के अध्ययन, मौजूदा अपशिष्ट-भराव स्थल से मिथेनोट्रॉफ्स को सक्रिय करने तथा मिथेनोट्रॉफिक जैव-कवर के डिज़ाइन पर केन्द्रित होगा।
जैव-प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोगों में मिथेनोट्रॉफ्स
- हम अपशिष्ट प्राकृतिक गैस अथवा जैवगैस से प्राप्त मिथेन का मूल्यवर्धन (valorization) कर रहे हैं, ताकि इसे जैवडीज़ल एवं एककोशिकीय प्रोटीन जैसे उत्पादों में परिवर्तित किया जा सके। भारत में, चूँकि मिथेनोट्रॉफ्स का नियमित रूप से संवर्धन नहीं किया गया था, सम्भवतः ऐसे अनुप्रयोगों का अभी तक अन्वेषण नहीं हुआ है।
List of Publications/ Patents/Varieties:
Papers published in refereed journals
- Rahalkar, M. C., Khatri, K., Pandit, P., Bahulikar, R. A., & Mohite, J. A. (2021). Cultivation of Important Methanotrophs From Indian Rice Fields. Frontiers in Microbiology, 12, 669244. https://doi.org/10.3389/fmicb.2021.669244
- Khatri, K., Mohite, J., Pandit, P., Bahulikar, R. A., & Rahalkar, M. C. (2021). Isolation, Description, and Genome Analysis of a Putative Novel Methylobacter Species (‘Ca. Methylobacter coli’) Isolated from the Faeces of a Blackbuck (Indian Antelope). Microbiology Research, 12(2), 513-523. https://doi.org/10.3390/microbiolres12020035
- Mohite JA, Manvi SS, Pardhi K, Khatri K, Bahulikar RA & Rahalkar MC (2023) Thermotolerant methanotrophs belonging to the Methylocaldum genus dominate the methanotroph communities in biogas slurry and cattle dung: A culture-based study from India. Environmental Research 228: 1-6. https://doi.org/10.1016/j.envres.2023.115870
- Mohite JA, Manvi SS, Pardhi K, Bahulikar R, Patange S, Deshpande S, Joshi M, Kulkarni S & Rahalkar MC (2023) Diverse Type I and Type II methanotrophs cultivated from an Indian freshwater wetland habitat. International Microbiologyhttps://doi.org/10.1007/s10123-023-00415-4
- Mohite JA, Khatri K, Pardhi K, Manvi SS, Jadhav R, Rathod S & Rahalkar MC (2023) Exploring the Potential of Methanotrophs for Plant Growth Promotion in Rice Agriculture. Methane 2: 361-371.
- Rahalkar, M.C., Mohite, J.A., Pardhi, K. ,Manvi,SS., Kadam, S.S., Patil, Y.Y (2024) Insights into Methylocucumis oryzae, a Large-sized, Phylogenetically Unique Type Ia Methanotroph with Biotechnological Potential. Indian J Microbiolhttps://doi.org/10.1007/s12088-024-01347-x
- Rahalkar, M.C., Khatri, K., Pandit, P. and Mohite, J. Polyphasic Characterization of Ca. Methylomicrobium oryzae: A Methanotroph Isolated from Rice Fields. Indian J Microbiol (2024). published online 29th August 2024 https://doi.org/10.1007/s12088-024-01381-9
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि:
- रहालकर एम. सी., खत्री के., पंडित पी., बहुलीकर आर. ए., एवं मोहिते, जे. ए. (2021). फ्रण्टियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी, 12, 669244https://doi.org/10.3389/fmicb.2021.669244
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- मोनाली रहालकर को ‘दुर्गा पुरस्कार’, लोकसत्ता द्वारा, अक्टूबर 2022 में प्रदान किया गया।
- रोटरी क्लब ऑफ़ पुणे प्राइड द्वारा एम. सी. रहालकर को वोकेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस–2024 के अवसर पर प्रदान।
- डॉ. एम. सी. रहालकर को तकनीकी विशेषज्ञ समिति, “एनर्जी बायोसाइंस, इन्वायरनमेंटल एवं फ़ॉरेस्ट बायोटेक्नोलॉजी”,जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी ), भारत सरकार में सदस्य (अप्रैल 2022–2025) के रूप में नामित किया गया।
हस्तांतरित प्रौद्योगिकियाँ
- विषाणु आरएनए, डीएनए तथा अन्य जैव-अणुओं के निदान हेतु न्यूक्लिक-अम्ल-आधारित परीक्षण-किट।यह प्रौद्योगिकी फ़ास्टसेंस इनोवेशन्स प्रा. लि., पुणे को हस्तांतरित की गई।
- एस.के.आर. एग्रो, वर्धा को हस्तांतरित प्रौद्योगिकियाँ, (1) मीलिबग नियंत्रण हेतु तेल-नैनोफ़ॉर्म्युलेशन, (2) कॉपर नैनोकण एक प्रतिजैविक एजेंट के रूप में (3) ज़िंक-चिटोसान नैनोकण फॉर्म्युलेशन (Zn-CNP ) – फसल में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व की आपूर्ति हेतु फोलियर स्प्रे के रूप में
स्वीकृत नए बाह्य-अनुदानित परियोजनाएँ
- कैंडिडेट चिकनगुनिया वायरस टीका (Vaccine) : वयस्क एवं वृद्ध माउस मॉडल में इ2 प्रोटीन-लोडेड पीएलजीए-पीइजी नैनोकण-आधारित कैंडिडेट टीका (Vaccine) की प्रभावकारिता का परीक्षण। डीएसटी नैनोमिशन, पीआई: योगेश ए. कर्पे, को-पीआई: वीरेन्द्र गजभिए अनुदान: 66.47 लाख; अवधि: मार्च 2022 – मार्च 2025
- लिपिड मेटाबॉलिज़्म में ऑटोफैजी-संबंधित जीन-1 (एटीजी 1) की कार्यप्रणाली का निर्धारण।आईसीएमआर; पीआई: भूपेन्द्र श्रावगे, को-पीआई: योगेश ए. कर्पे, अनुदान: 58.57 लाख, अवधि: मार्च 2024 – मार्च 2026
- धान कृषि में मीथेन-शमन एवं पादप-वृद्धि संवर्धन हेतु मीथेनोट्रोफ़्स का अनुप्रयोग।पावर फ़ेलोशिप, एसईआरबी, पीआई: मोनाली सी. रहालकर; अनुदान: 38.1 लाख, प्रोजेक्ट कोड: SPF/2022/000045, अवधि: नवम्बर 2022 – नवम्बर 2025
- विषाणु संक्रमण के रक्त-थक्का-निर्माण (blood coagulation) तंत्र पर प्रभाव का विश्लेषण तथा विषाणु-जनित रोगों के उपचार हेतु ड्रग-रीपरपोज़िंग की सम्भावनाओं का अन्वेषण।जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी); पीआई: योगेश कर्पे, को-पीआई: भूपेन्द्र श्रावगे; अनुदान: ₹54,17,840, अवधि: 25-09-2024 से 24-09-2027
- हैप्लैन्थोड्स प्रजातियों (कालेमेघ के वन्य संबंधी) से जैव-सक्रिय यौगिकों के पृथक्करण एवं चिकित्सकीय अन्वेषण।राजीव गांधी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग, महाराष्ट्र; पीआई: आर. के. चौधरी, को-पीआई: वीरेन्द्र गजभिए, अनुदान: ₹26,00,000, अवधि: फ़रवरी 2023 – फ़रवरी 2026
- हृदय-पुनरुत्पादन हेतु बहु-आयामी उपचार : लक्षित नैनो-वाहकों द्वारा न्यूक्लिक-अम्लों एवं जैव-सक्रिय अणुओं की आपूर्ति।विज्ञान और अभियान्त्रिकी अनुसंधान बोर्ड (एसइआरबी), भारत सरकार; पीआई: वीरेन्द्र गजभिए अनुदान: ₹77,00,000, अवधि: नवम्बर 2023 – नवम्बर 2026
- ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर कोशिकाओं में संभावित स्टेमनेस-जीन नॉकआउट हेतु सीआरआईएसपीआर–सीएएस- 9प्रौद्योगिकी का उपयोग, बहु-कार्यात्मक नैनो-हाइब्रिड्स के माध्यम से।भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारत सरकार; पीआई: वीरेन्द्र गजभिए, स्थिति: स्वीकृत
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. योगेश कर्पे
पदनाम : वैज्ञानिक –ई
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
- वैज्ञानिक, आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे, 01-01-2014 से वर्तमान तक
- डीएसटी इंस्पायर फ़ैकल्टी, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, 14-06-2012 से 31-12-2013
- पोस्टडॉक्टोरल एसोसिएट, सेंटर फ़ॉर इन्फ़ेक्शस डिज़ीज़ेस एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन, कॉलेज ऑफ़ वेटरिनरी मेडिसिन, वर्जीनिया टेक, ब्लैक्सबर्ग, वर्जीनिया, यूएसए, 25-05-2011 से 12-06-2012
संपर्क :
020-25325086 (दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- पीएच.डी., राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, वर्ष 2012, अध्ययन क्षेत्र: विषाणु विज्ञान
- एम.एससी., प्राणीशास्त्र विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, वर्ष 2006, अध्ययन क्षेत्र: प्राणीशास्त्र
अनुसंधान अभिरुचियाँ
- धनात्मक ध्रुवीयता (Positive sense) आरएनए विषाणुओं के प्रतिकृति एवं रोगजनन का अध्ययन।
- विषाणु-टीकों के विकास हेतु नविन (novel) वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
Key Publications:
Papers published in refereed journals
- Patil R, Salunke P, Karpe YA. (2023) Unravelling the Tripartite Interactions Among Hepatitis E Virus RNA, miR-140 and hnRNP K. Journal of Molecular 15;435(10):168050
- Karpe, Y. A. (2024). Processing of the hepatitis e virus ORF1 nonstructural polyprotein. Frontiers in Virology, 3: 1327745
- Nangare, R. A., Gajbhiye, V., & Karpe, Y. A. (2024). Role of miRNAs in the Chikungunya virus replication and pathogenesis. Frontiers in Virology, 4: 1386580.
- Patra S. Gajbhiye, V., & Karpe, Y. A. (2024). Assessment of heat-killed E. coli expressing Chikungunya virus E2 protein as a candidate vaccine for dual protection against Chikungunya virus and E. coli. Frontiers in Immunology, accepted
विदेशी / भारतीय पेटेंट (प्रदत्त / आवेदन दाखिल किये गए):
वाई. कर्पे, वी. गजभिए, डी. बोडस तथा पी. ढ़ाकेफलकर विषाणु आरएनए, डीएनए तथा अन्य जैव-अणुओं के निदान हेतु न्यूक्लिक-अम्ल-आधारित परीक्षण-किट तथा उससे सम्बद्ध परख (Assay)।पेटेंट आवेदन संख्या: 202121027919, अनुदान तिथि: 26-06-2024
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
- राजश्री पाटिल : हेपेटाइटिस ई विषाणु की प्रतिकृति में माइक्रोआरएनए की भूमिकाएँ।
- अनुसंधान-निर्देशक :डॉ. वाई. ए. कर्पे
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
डॉ. योगेश कर्पे को डीएसटी–इंस्पायर फ़ैकल्टी फ़ेलोशिप चयन समिति में दो वर्षों के लिए सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. सचिन जाधव
पदनाम : वैज्ञानिक –ई
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
वैज्ञानिक करियर
- वैज्ञानिक–डी , आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे — वर्तमान
- अनुसंधान वैज्ञानिक, मूल कोशिका अनुसंधान एवं चिकित्सा, विभाग– रुधिरविज्ञान (Hematology), एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ — सितंबर 2008 से नवंबर 2013
- पोस्ट–डॉक्टोरल फेलो, वेन स्टेट यूनिवर्सिटी, मिशिगन, यूएसए — 2007
- पोस्ट–डॉक्टोरल फेलो, टेम्पल यूनिवर्सिटी, पेंसिल्वेनिया, यूएसए(यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया, पीए, यूएसए के सहयोग से कार्य), जुलाई 2005 से दिसंबर 2006
पुरस्कार
- ‘न्यू इन्वेस्टिगेटर’ पुरस्कार, 98वीं एएसीआर (अमेरिकन एसोसिएशन फ़ॉर कैंसर रिसर्च) वार्षिक बैठक, 2007, लॉस एंजिलिस, कैलिफ़ोर्निया, यूएसए
- भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईव्हीआरआई) — कनिष्ठ अनुसंधानवृत्ति (जेआरएफ)
- कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) — व्याख्याता पात्रता प्रमाणन
- बृहद भारतीय समाज (स्वर्ण पदक) स्नातकोत्तर अध्ययन हेतु छात्रवृत्ति
- महात्मा फुले मेधावी स्नातक अध्ययन हेतुसह-छात्रवृत्ति
संपर्क :
+ 91-20-25325139 (दूरभाष) , 0091 20 25651542 (फैक्स)
शैक्षणिक योग्यता
- पशु चिकित्सा औषधि-विज्ञान में पीएच.डी. (2005), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईव्हीआरआई), बरेली, उत्तर प्रदेश (भारत)
- पशु चिकित्सा औषधि-विज्ञान में एम.व्हीएससी. (2001), मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र (भारत)
अनुसंधान अभिरुचियाँ
प्रयोगशाला के पशु देखभाल एवं पशु मॉडल का विकास
- प्रयोगशाला पशु सुविधा (animal facility ) के कर्मचारियों की मुख्य जिम्मेदारी प्रयोगशाला पशुओं की उपनिवेशों (colonies) का प्रजनन एवं रख-रखाव करना है, जो सीपीसीएसइए तथा संस्थान-स्तरीय पशु देखभाल सिद्धांतों, नियमों, विनियमों एवं दिशानिर्देशों के पूर्ण अनुपालन में किया जाता है।
- हमने विभिन्न जैविक रूप से सक्रिय अणुओं के परीक्षण हेतु अनेक पशु रोग मॉडल विकसित किए हैं, जिनमें शामिल हैं:तीव्र वृक्क अक्षमता (acute renal failure), दीर्घकालिक (chronic) वृक्क अक्षमता, हृदयपेशी घात (myocardial infarction), प्रायोगिक स्व-प्रतिरक्षित एन्सेफ़लोमायलाइटिस, मधुमेह, ऑस्टिओकॉन्ड्रल दोष, स्तन कैंसर, अल्ज़ाइमर रोग, सूजन-प्रेरित रक्ताल्पता, घातक रक्तस्रावी चोट, दीर्घकालिक घाव विच्छेदन मॉडल
मूल कोशिका अनुसंधान एवं चिकित्सा
- हमने विभिन्न ऊतक स्रोतों — जैसे भ्रूणीय गुर्दा, भ्रूणीय हृदय तथा अस्थि-मज्जा — से मूल कोशिकाओं को पृथक किया है। इन मूल कोशिकाओं की चिकित्सीय प्रभावकारिता का मूल्यांकन अनेक पशु रोग मॉडलों में किया गया है, जिनमें तीव्र वृक्क अक्षमता, हृदयपेशी घात, प्रायोगिक स्व-प्रतिरक्षित एन्सेफ़लोमायलाइटिस तथा संपूर्ण हृदय विफलता (global heart failure) शामिल हैं।
- वर्तमान में हमारा अनुसंधान अविषाणुजन्य ट्रांसफेक्शन की नवीन विधियों के विकास पर केंद्रित है, जिनका उद्देश्य हृदय-विशिष्ट प्रतिलेखन कारकों (cardiac specific transcription factors) को हृदय-तंतुकोशिकाओं में (cardiac fibroblast) में प्रविष्ट कराना है, ताकि इस्कीमिक हृदयपेशी घात की परिस्थितियों में इन कोशिकाओं से हृदय पेशी कोशिकाओ (कार्डियोमायोसाइट्स) का प्रेरण किया जा सके।
विभिन्न रोगों हेतु माइक्रोआरएनए(miRNA) -आधारित चिकित्सकीय उपाय
- हम तीव्र तथा दीर्घकालिक वृक्क अक्षमता के उपचार हेतु माइक्रोआरएनए(miRNA) -आधारित चिकित्सीय विकसित करने पर कार्य कर रहे हैं, और इसी विषय पर हमारे पास एक आंतरिक (intramural) अनुसंधान परियोजना भी रही है।
- हमने हृदयपेशी पुनर्निर्माण (myocardial repair) के लिए नैनोकण-आधारित माइक्रोआरएनए(miRNA)डिलीवरी प्रणालियों की क्षमता का मूल्यांकन किया है।
- हाल ही में हमारा अनुसंधान इस दिशा में केंद्रित है कि हृदयपेशी घात के उपरांत ऑटोफैगी और अपोप्टोसिस के मध्य होने वाले क्रॉस-टॉक को नियंत्रित करने वाले माइक्रोआरएनए(miRNA) -नियंत्रित संकेतन अणुओं की पहचान और उनकी कार्यप्रणाली का अनावरण किया जाए।
नैनोप्रौद्योगिकी के जैव-चिकित्सीय अनुप्रयोग
- हमने जीवाणुजन्य सेल्युलोज-आधारित द्विस्तरीय स्कैफ़ोल्ड्स की क्षमता का मूल्यांकन ऑस्टिओकॉन्ड्रल दोष के चूहे मॉडल में किया, और पाया कि ये स्कैफ़ोल्ड्स उपास्थि (cartilage) के क्रमिक पुनर्जनन को प्रोत्साहित करते हैं।
- हमने एसएमएआर 1 प्रोटीन के संक्षिप्त परिक्षेत्र (truncated domain) (एचआईएस 5) को कार्बन नैनोस्फ़ियर्स (CNS) पर लोड करके इसकी स्तन कैंसर–धारी चूहों में कैंसररोधी सक्रियता का निर्धारण किया।
- वर्तमान में हमारा अनुसंधान पृष्ठ क्रियात्मकित (surface functionalized) लैन्थेनम–स्ट्रॉन्शियम–मैंगनीज़ ऑक्साइड नैनोकणों द्वारा प्रेरित अतिताप तथा डॉक्सोरूबिसिन की संयोजित चिकित्सा का स्तन कैंसर के उपचार हेतु अध्ययन करने पर केंद्रित है।
List of Publications/ Patents/Varieties:
Papers published in refereed journals
- D.Khairnar,A.Padhye,V.Madiwal,A.Jha,S.H.Jadhav,J.M.Rajwade.(2023)Cyclicβ-hairpinpeptideloadedPLGA nanoparticles:apotentialanti-amyloidtherapeutic.Materials Today Communications35:106322.doi.org/10.1016/j.mtcomm.2023.106322(IF:3.8)
- Padhye-PendseA,UmraniR,PaknikarK,JadhavS,RajwadeJ.LifeSci.2024Jun15;347:122667.(IF:4.6)
- S. Tawre, A. Padhye, S. Chakraborty, N. Kulkarni, G. Bose, S. Mittal, U. Jadhav, S. Jadhav, J.M. Rajwade, K. Pardesi, Bioactive Curcuma aromatica-stabilized silver nanoparticles embedded chitosan dressing with improved antibacterial, anti-inflammatory, and wound healing properties. Carbohydrate Polymer Technologies and Applications 8 (2024) 100570.
- Savardekar A, Fernandes E, Padhye-Pendse A, Gupta T, Pol J, Phadke M, Desai S, Jadhav S, Rajwade J, Banerjee A. Adipocytes Promote Endometrial Cancer Progression Through Activation of the SIRT1-HMMR Signaling Axis. Molecular Carcinogenesis. 2024 1002/mc.23815. Epub ahead of print. PMID: 39254492.
- Henry Kolge, Gokul Patil, Sachin Jadhav Vandana Ghormade (2023) A pH-tuned chitosan-PLGA nanocarrier for fluconazole delivery reduces toxicity and improves efficacy against resistant Int J Biol Macromol 227 (2023) 453–461 B
- Gokul Patil, Rutuja Pawar, Sachin Jadhav and VandanaGhormade 2022, A chitosan based multimodal “soft” hydrogel for rapid hemostasis of non-compressible hemorrhages and its mode of action. Carbohydr Polym Technol Appl 4: 100237
- Shete, N.Ghatpande , M.Varma , P.Joshi , K. Suryavanshi, A. Misar, S. Jadhav , P.Apte , P. Kulkarni . Chronic dietary iron overload affects hepatic iron metabolism and cognitive behavior in Wistar rats J Trace Elem Med Biol doi: 10.1016/j.jtemb.2024.127422. Epub 2024 Mar 2.
- Singh, K. Patel , A.Navalkar , P. Kadu, D. Datta , D. Chatterjee , S. Mukherjee , A. Shaw , S. Jadhav , S. K Maji.(2023) Amyloid fibril-based thixotropic hydrogels for modeling of tumor spheroids in vitro. Biomaterials 295(10):122032.
- Neha Kulkarni-Dwivedi, R Patel , B.Shravage , R.D. Umrani, K.Paknikar , S. H Jadhav. Hyperthermia and doxorubicin release by Fol-LSMO nanoparticles induce apoptosis and autophagy in breast cancer cells Nanomedicine (Lond)2022 Oct;17(25):1929-1949.doi: 10.2217/nnm-2022-0171.
- R J Waghole,AV Misar, F Khan , D G Naik , S H Jadhav . In vitro and in vivo anti-inflammatory activity of Tetrastigmasulcatum leaf extract, pure compound and its derivatives. Inflammopharmacology 2022 Feb;30(1):291-311.
- A Navalkar ,S Pandey,NSingh,KPatel,DDatta,B Mohanty ,S Jadhav,PChaudhari,S.K Mazi. Direct evidence of cellular transformation by prion-like p53 amyloid infection. J Cell Sci. 2021 Jun 1;134(11)
प्रदान की गई पीएच.डी. उपाधि
- नेहा कुलकर्णी: “स्तन कैंसर के उपचार हेतु सतह-संशोधित लैन्थेनम–स्ट्रॉन्शियम–मैंगनीज़ ऑक्साइड नैनोकणों द्वारा प्रेरित हाइपरथर्मिया पर अध्ययन”; मार्गदर्शक: डॉ. एस. एच. जाधव
गूगल स्कॉलर / सामाजिक माध्यम
नाम : डॉ. प्रतिभा
पदनाम : डीएसटी–इंस्पायर फ़ैकल्टी(मार्च 2022 - वर्तमान तक)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
- पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कॉन्स्टान्ज़, जर्मनी (2019–2021)
- पीएच.डी. (रसायन विज्ञान), आईआईटी कानपुर (2018)
संपर्क :
रिसर्चगेट: https://www.researchgate.net/profile/Pratibha-Jhaba
शैक्षणिक योग्यता
- पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कॉन्स्टान्ज़, जर्मनी (2019–2021)
- पीएच.डी. (रसायन विज्ञान), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर (2018)
अनुसंधान अभिरुचियाँ
न्यूक्लिक-अम्ल रसायन में अनुसंधान मौलिक जैविक प्रक्रियाओं की समझ, निदान-विकास तथा चिकित्सीय हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यूक्लिक-अम्ल रसायन में मेरी कुछ प्रमुख अनुसंधान अभिरुचियाँ निम्नलिखित हैं:
- कार्यात्मक न्यूक्लियोसाइड समरूपक एवं न्यूक्लिक अम्ल (Functional nucleoside analogs and nucleic acids)
- डीएनए नैनोप्रौद्योगिकी: डीएनए-कार्यात्मकीकृत (DNA-functionalized) नैनोकण
- न्यूक्लिक अम्ल–प्रोटीन अंतःक्रियाएँ
- न्यूक्लिक-अम्ल-आधारित निदान
List of Publications/ Patents/Varieties
- A. Butterworth, Pratibha, A. Marx, D. K. Corrigan ‘’Electrochemical Detection of Oxacillin Resistance using Direct-labelling Solid-phase Isothermal Amplification’’ ACS Sens. 2021, 6, 3773–3780.
- K. Yadav, Pratibha, T. G. Gopakumar, S. Verma “Solution-Processed Large-Area Ultrathin Films of Metal-Coordinated Studied metal-nucleobase interactions by Electron-Rich Adenine-Based Ligand” J. Phys. Chem. C 2019, 123, 20922−20927.
- Pratibha, M. Shukla, G. Kaul, S. Chopra, S. Verma. “Nucleobase Soft Metallogel Composites with Antifouling Activities Against ESKAPE Pathogens” ChemistrySelect 2019, 4, 1834-1839.
- B. Mohapatra, Pratibha, K. R. Saravanan, S. Verma “2,6-Diaminopurine-Zinc Complex for Primordial Carbon Dioxide Fixation” Inorg. Chim. Acta 2019, 484, 167-173.
- Pratibha, S. Singh, S. Sivakumar, S. Verma “Purine-Based Fluorescent Sensors for Imaging Zinc Ions in HeLa Cells” Eur. J. Inorg. Chem. 2017, 4202-4209.
- B. Mohapatra,† Pratibha,† S. Verma “Directed Adenine Functionalization for Creating Complex Architectures for Material and Biological Applications” Chem. Commun. 2017, 53, 4748-4758.
- J. Kumar, Pratibha, S. Verma “Crystallographic Signatures of Silver-Purine Frameworks with an Azide Functionality” Inorg. Chim. Acta 2016, 452, 214-221
- Pratibha, S. Verma “Imine Component Based Modified Adenine Nucleobase-Metal Frameworks” Cryst. Growth Des. 2015, 15, 510-516.
नाम : शैलेश वाघमारे
पदनाम : प्रयोगशाला सहायक - सी
कार्य विवरण :
प्रयोगशाला प्रलेखन
- प्रयोगशाला प्रलेखन से संबंधित सभी कार्यों के संधारण / अद्यतन / अभिलेख-रखरखाव का कार्य
- सभी प्रकार के आधिकारिक दस्तावेज़ों का प्रसंस्करण
- पत्रों, दस्तावेज़ों आदि का जमा करना / लाना
- आदान-प्रदान: अनुरोधों का प्रेषण (नोट लिखकर / मेल द्वारा) एवं अनुवर्ती कार्यवाही (मेल / दूरभाष द्वारा)
- कंप्यूटर अभिलेखों के अनुसार कंप्यूटर डाटा एंट्री एवं मुद्रण कार्य
- प्रयोगशाला प्रलेखन से संबंधित विविध कार्य
- दस्तावेज़ीकरण संबंधी अथवा वैज्ञानिकों द्वारा सौंपे गए अन्य किसी भी प्रकार के कार्य
प्रयोगशाला प्रबंधन
- जैव-अपशिष्ट निष्पादन प्रबंधन
- स्थानीय क्रय एवं सामान्यत: आवश्यक प्रयोगशाला उपकरणों की खरीद-प्राप्ति का प्रबंधन—उनका चयन, कोटेशन विश्लेषण, मांग-पत्र तैयार करना, सामग्री अनुवर्ती कार्यवाही, निर्गमन, तथा उनके भंडारण एवं संग्रहण हेतु कार्यस्थल प्रबंधन
- समूह गतिविधियों का प्रबंधन एवं प्रयोगशाला की स्वच्छता, रखरखाव, अभिलेख खोज, गुम वस्तुओं की तलाश, प्रयोगशाला सामग्री की क्षति की जांच आदि का पर्यवेक्षण
- प्रयोगशाला प्रबंधन से संबंधित विविध कार्य
- वैज्ञानिकों द्वारा सौंपे गए प्रयोगशाला प्रबंधन से संबंधित अन्य किसी भी प्रकार के कार्य
वैज्ञानिक सहकार्य
- नियमित सूक्ष्मजीव-विज्ञान तथा उपसंवर्धन कार्य
- वैज्ञानिक द्वारा सौंपे गए प्रायोगिक कार्य
- एएएस एवं एक्सआरडी नमूना विश्लेषण हेतु सौंपे गए नियमित उपकरणीय कार्य
- अन्य संस्थानों के नैनोकण नमूनों का विश्लेषण / विशेषण / परीक्षण
- विविध वैज्ञानिक सहकार्य कार्य
- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के दौरान एआरआई का प्रतिनिधित्व किया
संपर्क :
9423218215(चल-दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- एम.एससी. (सूक्ष्म जीवविज्ञान) + कंप्यूटेशनल जीवविज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Publications/ Achievements/ Awards
Publication: In the journal Geochemistry, Geophysics, Geosystems, the title of the paper is “Implications of microbial thiosulfate utilization in red clay sediments of the Central Indian Basin – The Martian Analogy,” this is my first official publication for assisting the Scientist in his work.
पुरस्कार : संस्थान का ‘सुखात्मे पुरस्कार’ सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी हेतु प्राप्त किया
उपलब्धि : कोव्हीड-19 परीक्षण एवं संबंधित डाटा एंट्री कार्य में वैज्ञानिकों को सहयोग
नाम : रुपाली बांबे
पदनाम : तकनिकी सहायक - बी
कार्य विवरण :
विषाणुविज्ञान में आण्विक तकनीकों एवं टीका विकास हेतु पशु-संभाल (animal handling) में विशेषज्ञता।
संपर्क :
+91-9552559349 (चल-दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- बी.एससी. सूक्ष्म जीवविज्ञान
- एम.एससी. सूक्ष्म जीवविज्ञान
Publications/ Achievements/ Awards
Nil
नाम : अतुल द्विवेदी
पदनाम : तकनिकी सहायक - बी
कार्य विवरण :
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एवं एनर्जी डिस्पर्सिव स्पेक्ट्रोस्कोपी सुविधा।
संपर्क :
020-25325088 (दूरभाष)
शैक्षणिक योग्यता
- बी.ई. (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन), आरजीपीवी, भोपाल
- पीजीडीबीएम, मुंबई विश्वविद्यालय
- एम.टेक. (माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स), बिट्स-पिलानी
Publications/ Achievements/ Awards
नाम : आज़म शेख़
पदनाम : कनिष्ठ अनुसंधान सहविज्ञानी
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
- एम.एससी. जैव प्रौद्योगिकी (२०१४-२०१६),
- सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज (एसएसबीएस, पुणे) में परियोजना सहायक के रूप में जैवविश्लेषणात्मक रसायन के क्षेत्र में कार्य किया,
- राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र (एनसीसीएस, पुणे) में परियोजना सहायक के रूप में कैंसर जीवविज्ञान के क्षेत्र में कार्य किया,
- भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर, पुणे) में परियोजना अध्येता के रूप में अनुसंधान क्षेत्र में कार्य किया
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- नौरोसजी वाडिया कॉलेज, पुणे से बी.एससी. जैव प्रौद्योगिकी।
- मॉडर्न कॉलेज, गणेशखिंड से एम.एससी. जैव प्रौद्योगिकी।
- जीएटीइ २०१७
- जीएटीइ २०२०
अनुसंधान अभिरुचियाँ
पुनर्योजी जीवविज्ञान; हृदय मरम्मत और पुनर्जनन।
- मेरी अभिरुचि विभिन्न कोशिका प्रकारों सहित कोशिकीय वृद्धि, विभेदन और प्रसार की सूक्ष्म-समन्वित क्रियाविधियों को समझने में है।
- वर्तमान में, पुनर्योजी जीवविज्ञान में मेरे अध्ययन में हृदयपेशीक्षति के बाद हृदयपेशी पुनर्जनन के लिए माइक्रोआरएनए (miRNAs) के प्रेषण हेतु नैनोकणों का उपयोग शामिल है। कार्डियोमायोसाइट्स हृदय की कोशिकाएँ हैं जो अंतिम रूप से विभेदित होती हैं, और हृदय के उचित कार्य के लिए उत्तरदायी होती हैं तथा इनकी पुनर्योजी क्षमता सीमित होती है। हृदयपेशी घात कार्डियोमायोसाइट्स की संख्या को उल्लेखनीय रूप से कम कर देता है, जिससे हृदय की मांसपेशी में निशान ऊतक (scarring) या तंतुमयता (fibrosis) हो जाती है।
List of Publications/ Patents/Varieties
Not Yet
नाम : स्नेहल कुलकर्णी
पदनाम : कनिष्ठ अनुसंधान सहविज्ञानी
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
- स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान शैक्षणिक परियोजना “प्रक्रिया अनुकूलन, उत्पादन तथा लैक्टोबैसिलस प्रजाति द्वारा प्राप्त लैंटिबायोटिक की रोगाणुरोधी क्षमता का मूल्यांकन।”
- व्याख्याता पद (सीएचबी) शिवछत्रपति महाविद्यालय, औरंगाबाद (2017–2018)।
- मृदा से वर्णक उत्पादक एक्टिनोमायसीट्स का पृथक्करण तथा उनके अनुप्रयोग। (2018)
- व्याख्याता पद (सीएचबी) बद्रीनारायण बारवाले महाविद्यालय, जालना।
- सागरीय एक्टिनोमायसीट्स का स्क्रीनिंग तथा उनके अनुप्रयोग। (2019)
- औद्योगिक एंज़ाइम उत्पादक सागरीय एक्टिनोमायसीट्स का स्क्रीनिंग तथा एंज़ाइमों के अनुप्रयोग। (2019)
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- शैक्षणिक योग्यता बी.एससी. सूक्ष्मजीवविज्ञान, रसायनविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान (2015), डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद।
- एम.एससी. सूक्ष्मजीवविज्ञान (2017), डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद।
- ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (जीएटीइ) जीवन विज्ञान, 2019।
- जैव-प्रौद्योगिकी पात्रता परीक्षा – डीबीटी-जेआरएफ, 2019।
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मछलियों के नोडावायरस के विरुद्ध विषाणु-टीके (Viral vaccine) का उत्पादन, नैनो-प्रेषण (nanodelivery) तथा प्रमाणीकरण।
List of Publications/ Patents/Varieties
- International Journal of Current Research in Life Science, “Isolation of Pigment Producing Actinomycetes from Soil and Screening Their Antibacterial Activities against Different Microbial Isolates”, 2018.
- Journal for Advanced Research in Applied Sciences, volume-5, “Lip Balm Production from Pigment Producing Actinomycetes”, April-2018.
नाम : तन्मयी साठे
पदनाम : अनुसंधान छात्रा - यूजीसी-जेआरएफ़
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने हमेशा प्रश्नों के उत्तर खोजने, चुनौतियों का सामना करने और जीवन में नई चीजें सीखने में रुचि रखी है। अनुसंधान वह है जिसमें मेरी हमेशा गहरी रुचि रही है और मैं अपने काम से समाज में योगदान करने की उम्मीद करती हूँ।
स्नातकोत्तर के बाद, मैंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अपनी तैयारी जारी रखी। इस बीच मैंने आबासाहेब गरवारे कॉलेज में परियोजना-जेआरएफ के रूप में काम किया। मैंने दिसंबर-2019 में सीएसआईआर-एनइटी परीक्षा उत्तीर्ण की और मुझे यूजीसी फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
मैंने हाल ही में नैनो जीवविज्ञान समूह में एक अनुसंधान छात्रा के रूप में अपनी यात्रा शुरू की है और इस यात्रा के दौरान अधिक ज्ञान प्राप्त करने की आशा करती हूँ।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- एम.एससी. जैव प्रौद्योगिकी (2017) आबासाहेब गरवारे कॉलेज, पुणे
- बी.एससी. जैव प्रौद्योगिकी (2013) आबासाहेब गरवारे कॉलेज, पुणे
अनुसंधान अभिरुचियाँ
सूक्ष्मद्रविकी एक विकसित हो रहा क्षेत्र है जिसके अनुप्रयोग अध्ययन के कई अन्य क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। सूक्ष्म या नैनो स्तर पर तरल पदार्थों के गुणों और व्यवहार में परिवर्तन रोचक हैं और गुणों की खोज के लिए अन्य तकनीकों पर लागू किए जा सकते हैं। मेरे वर्तमान अनुसंधान अध्ययन में द्रवों के केशिका व्यवहार का पता लगाने के लिए छिद्रयुक्त और अछिद्रयुक्त केशिकाओं का सूक्ष्म-निर्माण शामिल है।
List of Publications/ Patents/Varieties
नाम : दीपाली चौधरी
पदनाम : पी.एचडी. छात्रा (यूजीसी-जेआरएफ)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनव्हियु), जोधपुर से संबद्ध लाछू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से पूरी की। इसके उपरांत, मैंने डॉ. सी.के. जॉन के मार्गदर्शन में सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे से इंटर्नशिप की।
मैंने सीएसआईआर-यूजीसी कनिष्ठ अनुसंधान सहाध्यायी (जेआरएएफ़) परीक्षा जीवन विज्ञान विषय में (दिसंबर 2018) उत्तीर्ण की है। वर्तमान में, मैं डॉ. वंदना घोरमाड़े के मार्गदर्शन में, आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे, महाराष्ट्र से कनिष्ठ अनुसंधान सहाध्यायी (यूजीसी) के रूप में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कर रही हूँ
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (जैव प्रौद्योगिकी), लाछू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जोधपुर
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), लाछू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जोधपुर
अनुसंधान अभिरुचियाँ
आरएनए हस्तक्षेप (interference), नैनो प्रौद्योगिकी, पादप ऊतक संवर्धन, और पादप संरक्षण। वर्तमान में, हम ऐसे लेपिडोप्टेरान कीटों में नैनोकण-नियोजित जीन मौनन पर काम कर रहे हैं, जो आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
Publications / Patents / Varieties
नाम : देवयानी सेनगर
पदनाम : पीएच.डी. शोधार्थी (डीएसटी इंस्पायर – जेआरएफ)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातक उपाधि जीवन विज्ञान में रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से, और स्नातकोत्तर उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में अन्नामलाई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु से प्राप्त की है। मैंने सीआरआई प्रयोगशाला, एसीटीआरईसी, मुंबई में डॉ. उज्ज्वला वारवडेकर के मार्गदर्शन में अनुसंधान प्रशिक्षु के रूप में कार्य किया। इस दौरान मेरा कार्य कोशिका संचार प्रोटीन (cell communication) और ईसीएम प्रोटीन की भूमिका तथाकैंसर चिकित्सा में उनकी प्रभावकारिता पर केंद्रित था।वर्तमान में, मैं आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे में नैनो जीवविज्ञान समूह में डॉ. वीरेंद्र गजभिए के मार्गदर्शन में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. (Ph.D.)कर रही हूँ।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (जीवन विज्ञान), रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), अन्नामलाई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु
अनुसंधान अभिरुचियाँ
लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA) आधारित जीन मौनन, नैनो प्रौद्योगिकी, और नैनो प्रौद्योगिकी तथा कैंसर जीव विज्ञान।वर्तमान में, हम कैंसर में जीन मौनन के लिए बहुस्तरीय और बहु-कार्यात्मक नैनो कण-मध्यस्थ लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA) प्रेषण पर कार्य कर रहे हैं।
Publications / Patents / Varieties
नाम : सुरजीत पात्रा
पदनाम : पीएच.डी. शोधार्थी (जेआरएफ)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातक उपाधि प्राणी विज्ञान में बर्दवान विश्वविद्यालय से, और स्नातकोत्तर उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में एडमास विश्वविद्यालय, कोलकाता से पूरी की है। तत्पश्चात, मैंने एडमास विश्वविद्यालय में आण्विक जीव विज्ञान और जैव सूचना विज्ञान विभाग में अनुसंधान सहायक के रूप में कार्य किया। वर्तमान में, मैं आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे में नैनो जीवविज्ञान समूह में डॉ. वीरेंद्र गजभिए और डॉ. योगेश अरविंद कर्पे के संयुक्त मार्गदर्शन में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कर रहा हूँ।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (प्राणी विज्ञान), बर्दवान विश्वविद्यालय
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), एडमास विश्वविद्यालय, कोलकाता
अनुसंधान अभिरुचियाँ
नैनोकण-आधारित पुनः संयोजित टीका विकास (Nanoparticle-based Recombinant Vaccine Development), कैंसर जीव विज्ञान, विषाणुविज्ञान, आण्विक जीवविज्ञान, और संगणकीय जीवविज्ञान।
विशेषज्ञता : नैनो प्रौद्योगिकी, जैव-सूचनाविज्ञान, आण्विक जीवविज्ञान, आरडीटी, प्रतिकृति निर्माण (cloning), पशु कोशिका संवर्धन, विषाणु संवर्धन, जीवाणु संवर्धन, पीसीआर, प्रोटीन शुद्धिकरण, एसडीएस-पीएजीइ, वेस्टर्न ब्लॉटिंग, एफएसीएस, प्रयोगशाला पशु प्रबंधन, और एलिसा (ELISA) में विशेषज्ञता।
List of Publications/ Patents/Varieties
नाम : राजकुमार सामंता
पदनाम : पीएच.डी. शोधार्थी (डीबीटी - जेआरएफ)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातक उपाधि प्राणी विज्ञान में मिदनापुर कॉलेज, विद्यासागर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल से वर्ष 2019 में प्राप्त की और अपनी स्नातकोत्तर उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में उत्कल विश्वविद्यालय, ओडिशा से वर्ष 2021 में प्राप्त की।
वर्तमान में, मैं आघारकर अनुसंधान संस्थान के नैनो जीवविज्ञान समूह में डॉ. वीरेंद्र गजभिए के मार्गदर्शन में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कर रहा हूँ।
Contact Details :
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (प्राणी विज्ञान), मिदनापुर कॉलेज, विद्यासागर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), उत्कल विश्वविद्यालय, ओडिशा
अनुसंधान अभिरुचियाँ
सीआरआईएसपीआर/सीएएस 9 प्रणाली (CRISPR/Cas9 system), नैनो प्रौद्योगिकी, और कैंसर जीव विज्ञान। वर्तमान में, हम सीआरआईएसपीआर/सीएएस 9 प्रणाली की जीन संपादन दक्षता (gene editing efficiency) की जाँच के लिए कैंसर कोशिकाओं में नैनोकण-मध्यस्थ सीआरआईएसपीआर/सीएएस 9 प्रणाली प्रेषण पर कार्य कर रहे हैं।
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नाम : नीलाद्रि हलदर
पदनाम : डीबीटी – जेआरएफ(पीएच.डी. छात्र)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातक उपाधि प्राणी विज्ञान में कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता से और स्नातकोत्तर उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से पूरी की है।
ममैंने जून, 2019 में सीएसआईआर-कनिष्ठ अनुसंधान फेलो (सीएसआईआर-जेआरएफ़) और 2020 में डीबीटी-कनिष्ठ अनुसंधान फेलो (डीबीटी-जेआरएफ़) परीक्षाएँ उत्तीर्ण की हैं
वर्तमान में, मैं आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे में डॉ. वीरेंद्र गजभिए के पर्यवेक्षण में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कर रहा हूँ।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (प्राणी विज्ञान), कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
अनुसंधान अभिरुचियाँ
जीन संपादन और जीन मौनन तकनीक, नैनो-आधारित प्रेषण प्रणाली, और कैंसर जीव विज्ञान।
वर्तमान में, मैं कैंसर कोशिकाओं में सीआरआईएसपीआर/सीएएस 9 सिस्टम की डिलीवरी के लिए लिपिड-आधारित नैनो-वाहक के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूँ। इसके अलावा, मैं सिलिका-आधारित नैनो-वाहक का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं में लघु-हस्तक्षेपी आरएनए (siRNA)-मध्यस्थ जीन मौननपर भी कार्य कर रहा हूँ।
List of Publications/ Patents/Varieties
नाम : काजल पारधी
पदनाम : पीएच.डी. छात्रा (यूजीसी– जेआरएफ)
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी स्नातकोत्तर उपाधि की पढ़ाई जैव प्रौद्योगिकी में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयु) से संबद्ध डॉ. आंबेडकर कॉलेज, नागपुर से पूरी की है। मैंने अपनी स्नातक उपाधि की पढ़ाई जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञानऔर रसायन विज्ञान विषयों में धोटे बंधु विज्ञान महाविद्यालय, गोंदिया से पूरी की।
मैं फरवरी 2022 में आयोजित यूजीसी-जेआरएफ और जीएटीइ-बीटी परीक्षाओं के लिए अर्हता प्राप्त कर चुकी हूँ।
मवर्तमान में, मैं अपनी सलाहकार डॉ. मोनाली सी. रहालकर के मार्गदर्शन में जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कर रही हूँ।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञानऔर रसायन विज्ञान), धोटे बंधु विज्ञान महाविद्यालय, गोंदिया
- स्नातकोत्तर (जैव प्रौद्योगिकी), डॉ. आंबेडकर कॉलेज, नागपुर
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मेरे अनुसंधान का केंद्र-बिंदु कैरोटीनॉयड उत्पादन और मीथेन शमन कारकों के रूप में उपयोग के लिए आर्द्रभूमि (wetland) वातावरण से मेथनोट्रोफिक जीवाणुओं का पृथक्करण और संवर्धन करना है। आण्विक पहचान तकनीकों के माध्यम से, मेरा उद्देश्य इन जीवाणुओं और उनकी अद्वितीय चयापचयी क्षमताओं का विशेषीकरण करना है।
List of Publications/ Patents/Varieties
नाम : शुभा मान्वी
पदनाम : पीएच.डी. छात्रा
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मूल सूक्ष्मजीव विज्ञान में गहरी रुचि के साथ, मैंने अपनी स्नातकोत्तर उपाधि अनुप्रयुक्त सूक्ष्मजीव विज्ञान में व्हीआईटी विश्वविद्यालय, वेल्लोर से, और स्नातक उपाधि सूक्ष्म जीवविज्ञान में फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे से प्राप्त की है।
अपनी उपाधि प्राप्त करने के बाद, मैंने नैनोकैप्सूल निर्माण, पादप ऊतक संवर्धन और अवायवीय कवक विज्ञान के क्षेत्रों में कार्य किया है।
संपर्क :
शैक्षणिक योग्यता
- सूक्ष्म जीवविज्ञान में बी.एससी. (2011-2014) - फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे
- अनुप्रयुक्त सूक्ष्मजीव विज्ञान में एम.एससी. (2014-2016) - व्हीआईटी विश्वविद्यालय, वेल्लोर
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मैं वर्तमान में मेथनोट्रॉफ्स के उपयोग पर काम कर रहा हूँ, जो आर्द्रभूमि (wetland) और धान के खेतों से उत्सर्जित होने वाली मीथेन को ऑक्सीकृत करने वाले एकमात्र ज्ञात मीथेन जैव-फिल्टर हैं। धान के खेत अवायवीय मिट्टी में मीथेनजनक जीवाणुओं की गतिविधि के कारण मानवजनित (anthropogenic) मीथेन उत्सर्जन के एक प्रमुख स्रोत हैं।
मेथनोट्रोफिक जीवाणुओं की मीथेन ऑक्सीकरण गतिविधि द्वारा, वातावरण में छोड़ी गई मीथेन को विनियमित किया जा सकता है, जिससे ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन कम होता है, और धान के पौधों की पादप वृद्धि प्रोत्साहन में सहायता मिलती है। कृषि में मेथनोट्रोफिक जीवाणुओं का उपयोग यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को भी कम करता है।
List of Publications/ Patents/Varieties
- Shubha Manvi, Varsha Parasharami, ‘Garcinia indica Choisy: Screening of location for donor female mother plants for micropropagation with effective protocol for establishment of sterile and healthy cultures’, Acta Scientific Agricultural Journal, Vol. 5(7), July 2019 https://actascientific.com/ASAG/pdf/ASAG-03-0514.pdf
- Gauri Mulik, Shubha Manvi, Gauri Ingale, Dr. Varsha Parasharami, Optimization of IBA for efficient rooting in micropropagated Garcinia indica Choisy for in-vitro and ex-vitro studies, Asian Journal Plant Reseasrch, Vol 2(4), May 2019 http://www.journalaprj.com/index.php/APRJ/article/view/30050/56390
- Shubha Manvi, Ushashi Bhattacharya, Veena Sreedharan, Dr. Bhaskar Rao K.V., Antimicrobial Activity of Streptococus variabilis strain- VITUMVB03 isolated from Kanyakunari marine sediments, Asian Journal of Pharmaceutical and clinical Research, Vol. 10 (9), September 2017 https://innovareacademics.in/journals/index.php/ajpcr/article/view/19250/12246
नाम : शिरीष सतीश कदम
पदनाम : परियोजना सहायक - II
संक्षिप्त पृष्ठभूमि :
मैंने अपनी एम.एससी. उपाधि जैव प्रौद्योगिकी में राजरर्षि शाहू महाविद्यालय से पूरी की और डॉ. रहालकर के मार्गदर्शन में एमएसीएस आघारकर अनुसंधान संस्थान से अपना छह महीने का परियोजना प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया।
मीथेन को ऑक्सीकृत करने और इस प्रकार वैश्विक ऊष्मीकरण को कम करने की उनकी क्षमता के कारण मेथनोट्रॉफ्स की दुनिया ने मुझे आकर्षित किया। अपने छह महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में, हमने धान की फसलों की पादप वृद्धि को बढ़ावा देने और उपज बढ़ाने के लिए मेथनोट्रॉफ्स की क्षमता का सफलतापूर्वक अन्वेषण किया।
अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए, मैंने डॉ. मोनाली सी. रहालकर के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट असिस्टेंट के रूप में कार्यभार संभाला। यहाँ मेरा कार्य धान की फसल के पीजीपीआर अनुप्रयोग और मीथेन ऑक्सीकरण क्षमता के लिए मेथनोट्रॉफ संवर्धनों के संवर्धन (cultivation) और रखरखाव पर केंद्रित है।
शैक्षणिक योग्यता
- बी.एससी. जैव प्रौद्योगिकी – शिवाजी विश्वविद्यालय 2013
- एम.एससी. सूक्ष्म जीवविज्ञान – एसपीपीयू 2015
अनुसंधान अभिरुचियाँ
मेथनोट्रोफिक जीवाणु जीव विज्ञान और इसके अनुप्रयोग, सूक्ष्मजीव विविधता और पारिस्थितिकी।

























